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ताइवान ने भारत को धन्यवाद देकर चीन को दिया सख्त संदेश

ताइवान ने भारत का धन्यवाद करते हुए कहा है कि दोनों देश अब एक समान दृष्टिकोण साझा कर रहे हैं। भारत ने चीन की सैन्य गतिविधियों पर चिंता जताई है, और ताइवान ने इसे एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संकेत माना है। दोनों देशों के बीच व्यापार, आर्थिक और समुद्री हित एक समान हैं, जो उन्हें मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए काम करने के लिए प्रेरित कर रहे हैं। जानें इस बढ़ती साझेदारी के पीछे की वजहें और चीन की प्रतिक्रिया।
 

ताइवान और भारत के बीच बढ़ती रणनीतिक साझेदारी

ताइवान के विदेश मंत्रालय ने भारत का आभार व्यक्त करते हुए कहा है कि दोनों देश अब एक समान दृष्टिकोण साझा कर रहे हैं। ताइवान ने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत ने चीन की सैन्य गतिविधियों के खिलाफ आवाज उठाई है, जिसके लिए उन्होंने भारत का धन्यवाद किया। मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत उनके लिए एक समान विचारधारा वाला साझेदार है। भारत ने पीआरसी चीन की सैन्य अभ्यासों पर अपनी चिंता व्यक्त की है। दोनों देशों के व्यापार, आर्थिक और समुद्री हित एक समान हैं, और वे मिलकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए कार्य करेंगे। यह केवल एक कूटनीतिक ट्वीट नहीं है, बल्कि चीन के लिए एक महत्वपूर्ण रणनीतिक संकेत है।


चीन की सैन्य गतिविधियों पर भारत की प्रतिक्रिया

चीन ने पिछले कुछ वर्षों में ताइवान के आसपास बड़े पैमाने पर नौसैनिक अभ्यास, फाइटर जेट्स की घुसपैठ और मिसाइलों की तैनाती की है। बीजिंग का स्पष्ट संदेश है कि ताइवान उनका है और वे जब चाहें ताकत का प्रदर्शन कर सकते हैं। लेकिन भारत ने इस पर चुप्पी साधने का निर्णय नहीं लिया। भारत ने कहा है कि ताइवान में शांति आवश्यक है और किसी भी प्रकार की सैन्य उकसावेबाजी को अस्वीकार किया जाना चाहिए। यह बात ताइवान के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


भारत की नई कूटनीतिक नीति

भारत अब चुप रहने की नीति को छोड़ चुका है और इंडो-पैसिफिक में अपनी भूमिका को बढ़ा रहा है। ताइवान की स्थिरता भारत के समुद्री हितों से जुड़ी हुई है, साथ ही सेमीकंडक्टर और तकनीकी कारक भी महत्वपूर्ण हैं। ताइवान विश्व का चिप हब है, और भारत को तकनीकी आवश्यकताएँ पूरी करने के लिए ताइवान की निकटता की आवश्यकता है। चीन को सबसे बड़ा डर यही है कि ताइवान को अंतरराष्ट्रीय समर्थन मिल जाए, और अब ताइवान खुलकर भारत का नाम ले रहा है।


भारत और ताइवान के बीच सहयोग

ताइवान ने स्पष्ट रूप से कहा है कि व्यापार, आर्थिक और समुद्री मामलों में भारत और ताइवान के हित जुड़े हुए हैं। इसका मतलब है समुद्री रास्तों की सुरक्षा, सप्लाई चेन और स्वतंत्र नेविगेशन, जो सीधे चीन के विस्तारवाद के खिलाफ खड़ा एक ब्लॉक है।