तुर्की और इजरायल के बीच बढ़ते तनाव पर नई चर्चाएँ
तुर्की के राष्ट्रपति एर्दोगान का एक पुराना भाषण हाल ही में फिर से चर्चा में आया है, जिसमें उन्होंने इजरायल के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात की थी। इस भाषण को गलत तरीके से पेश किया गया, जिससे इजरायल और अमेरिका के कई प्रमुख लोग इसे सच मानने लगे। इसके परिणामस्वरूप, तुर्की में इजरायल के प्रति नफरत बढ़ी है, और अब लगभग 93% तुर्की नागरिक इजरायल को नापसंद करते हैं। इस स्थिति ने तुर्की की राजनीति में भी बदलाव लाया है, जिससे देश के भीतर सुरक्षा और मजबूती पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।
Apr 24, 2026, 10:50 IST
एर्दोगान का पुराना भाषण फिर से चर्चा में
तुर्की के राष्ट्रपति रेसेप तैयप एर्दोगान का एक पुराना भाषण हाल ही में इंटरनेट पर फिर से चर्चा का विषय बन गया है। इस भाषण में उन्होंने इजरायल के खिलाफ सख्त रुख अपनाने की बात की थी। लेकिन इसे इस तरह से फैलाया गया जैसे उन्होंने इजरायल पर सैन्य हमले की धमकी दी हो। कुछ सोशल मीडिया अकाउंट्स ने इसका गलत अनुवाद करके इसे वायरल किया। इसके बाद, कई प्रमुख हस्तियों ने इसे सच मानकर साझा किया। यह झूठी खबर बड़े समाचार चैनलों और अखबारों तक भी पहुँच गई। 'द टेलीग्राफ' जैसी प्रमुख समाचार एजेंसी ने इसे प्रकाशित किया, लेकिन बाद में सच्चाई सामने आने पर इसे हटा दिया। जब यह स्पष्ट हो गया कि यह दावा गलत था, तब भी इजरायल की कुछ मीडिया ने इस पर चर्चा जारी रखी। कुछ रिपोर्टों में यह कहा गया कि तुर्की "अगला ईरान" बन सकता है और भविष्य में इजरायल के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
इजरायल और तुर्की के बीच संभावित टकराव
जब ईरान के साथ युद्ध की स्थिति बनी थी, तब भी इजरायल से ऐसे संदेश आए थे कि उनका अगला लक्ष्य तुर्की हो सकता है। इस पर वैश्विक सुर्खियाँ बनी थीं कि क्या इजरायल तुर्की के खिलाफ कोई कार्रवाई करेगा। ईरान, सीरिया, लेबनान और अन्य देशों के संदर्भ में इजरायल की आक्रामकता को देखते हुए, तुर्की और इजरायल के बीच भविष्य में तनाव बढ़ सकता है।
तुर्की में इजरायल के प्रति बढ़ती नफरत
तुर्की के विशेषज्ञ इजरायल के पूर्व प्रधानमंत्री नफ्ताली बेनेट के बयानों पर ध्यान दे रहे हैं, जिन्होंने तुर्की को एक 'बड़ा खतरा' बताया है। बेनेट ने संकेत दिया है कि तुर्की "अगला ईरान" बन सकता है। तुर्की में इस तरह की बातों को केवल राजनीतिक बयानबाजी नहीं माना जा रहा है, बल्कि इसे इजरायल की सोच में एक महत्वपूर्ण बदलाव के रूप में देखा जा रहा है। 7 अक्टूबर से पहले, गाजा का मुद्दा तुर्की में सभी के लिए समान नहीं था। लेकिन अब, तुर्की के लगभग एक-तिहाई लोग इजरायल को एक सीधा खतरा मानते हैं। यह डर इजरायल की बयानबाजी और ईरान तथा लेबनान में उनके आक्रामक सैन्य हमलों के कारण उत्पन्न हुआ है। परिणामस्वरूप, तुर्की की जनता में इजरायल के खिलाफ भारी गुस्सा है। वर्तमान में 93% तुर्की नागरिक इजरायल को नापसंद करते हैं। कई लोगों को यह भी चिंता है कि अगर ईरान हार गया, तो अगला निशाना तुर्की हो सकता है।
तुर्की की राजनीति में बदलाव
लोगों की इस सोच ने तुर्की की राजनीति को भी प्रभावित किया है। पिछले एक वर्ष में, तुर्की ने अपने देश को आंतरिक रूप से मजबूत करने और बाहरी दबावों से बचने पर ध्यान केंद्रित किया है। हालांकि इसे 'इजरायल से लड़ाई की तैयारी' नहीं कहा गया है, लेकिन इस नीति के पीछे का डर स्पष्ट है कि इजरायल में तुर्की के खिलाफ नफरत गहरी होती जा रही है।