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दक्षिण अफ्रीका में गोलीबारी की घटनाएं: 27 लोगों की जान गई, क्या है इसके पीछे का सच?

दक्षिण अफ्रीका में हालिया गोलीबारी की घटनाओं ने देश को हिला दिया है, जिसमें 27 लोगों की जान गई है। जोहानिसबर्ग और केपटाउन में हुई इन घटनाओं ने पुलिस और विशेषज्ञों को चिंतित कर दिया है। क्या ये घटनाएं किसी बड़े आपराधिक गिरोह का काम हैं? जानें पूरी कहानी और पुलिस की कार्रवाई के बारे में।
 

दक्षिण अफ्रीका में गोलीबारी से मचा हड़कंप


नई दिल्ली: दक्षिण अफ्रीका में हालिया गोलीबारी की घटनाओं ने पूरे देश को झकझोर दिया है। दो विभिन्न शहरों में हुई फायरिंग में कम से कम 27 लोगों की जान चली गई है। पुलिस ने रविवार को इस घटना की जानकारी दी। प्राप्त जानकारी के अनुसार, पहली घटना जोहानिसबर्ग के निकट हुई। पुलिस के अनुसार, शनिवार रात जोहानिसबर्ग के दक्षिण-पश्चिम में स्थित वेलेला टाउनशिप में 8 हथियारबंद हमलावरों ने एक बार में घुसपैठ की।


हमले में 17 लोगों की जान गई

हमलावरों के पास एके-47 राइफल और पिस्तौलें थीं। उन्होंने पहले बार के बाहर खड़े ग्राहकों पर गोलियां चलाईं और फिर अंदर जाकर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी। इस हमले में 17 लोगों की मौत हो गई, जिनमें 13 पुरुष और 4 महिलाएं शामिल हैं। 15 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं और उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया गया है। पुलिस ने बताया कि हमलावरों ने लोगों को मारने के बाद उनकी तलाशी ली और मोबाइल फोन लूटकर फरार हो गए। रविवार शाम तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।


केपटाउन में भी हुई गोलीबारी

दूसरी घटना केपटाउन के निकट हुई। पुलिस के अनुसार, शनिवार देर रात करीब एक बजे त्वादले क्षेत्र में एक दुकान पर गोलीबारी की गई, जिसमें 10 लोगों की जान गई। यह ध्यान देने योग्य है कि ये दोनों घटनाएं पूर्वी तट के शहर डरबन के पास एक हाउस पार्टी में हुई फायरिंग के कुछ दिन बाद हुई हैं, जिसमें एक गर्भवती महिला समेत 11 लोगों की मौत हो गई थी।


हिंसा की बढ़ती घटनाएं चिंता का विषय

दक्षिण अफ्रीका पिछले कई वर्षों से बढ़ते अपराध और हिंसा से जूझ रहा है, लेकिन एक ही हफ्ते में तीन सामूहिक हत्याओं ने सभी को चौंका दिया है। पुलिस का मानना है कि इन घटनाओं के पीछे किसी बड़े आपराधिक गिरोह का हाथ हो सकता है।


विशेषज्ञों का कहना है कि हाल की घटनाओं में एक समान पैटर्न देखा जा रहा है, जिसमें कई हथियारबंद लोग गरीब बस्तियों में लोगों को निशाना बना रहे हैं। इस प्रकार के हमले सबसे अधिक गरीब समुदाय को प्रभावित कर रहे हैं। पुलिस दोनों मामलों में हमलावरों की तलाश कर रही है, लेकिन अभी तक कोई सुराग नहीं मिला है। इससे पहले जून में भी जोहानिसबर्ग में इसी तरह की घटना हुई थी।