दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति की भारत यात्रा: एशिया में शक्ति संतुलन में बदलाव
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे मंग की भारत यात्रा ने एशिया में शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण बदलाव लाने का संकेत दिया है। इस यात्रा के दौरान, भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंधों को मजबूत करने की कोशिश की गई है, जो किम जोंग उन के लिए एक संभावित खतरे का संकेत है। जानें इस यात्रा के पीछे की रणनीतिक वजहें और उत्तर कोरिया की प्रतिक्रिया।
Apr 21, 2026, 13:25 IST
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति का भारत दौरा
दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति ली जे मंग ने भारत का दौरा किया, और जैसे ही उन्हें दिल्ली में राजकीय सम्मान के साथ गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया, प्योंगयांग में हलचल बढ़ गई। किम जोंग उन इस पूरे कार्यक्रम को ध्यान से देख रहे थे। यह केवल एक कूटनीतिक मुलाकात नहीं थी, बल्कि एशिया में शक्ति संतुलन के बदलते समीकरणों की एक महत्वपूर्ण कहानी भी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति ली जे मंग के बीच हैदराबाद हाउस में एक उच्च स्तरीय बैठक हुई। राष्ट्रपति द्रोपदी मुर्मू ने राष्ट्रपति भवन में उनका भव्य स्वागत किया। इस मुलाकात के पीछे केवल यह सवाल नहीं है कि यह क्यों और कैसे हुई, बल्कि यह भी है कि इसे सबसे ज्यादा किसने ध्यान से देखा? उत्तर है उत्तर कोरिया।
दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के रिश्ते
दक्षिण कोरिया और उत्तर कोरिया के बीच के रिश्ते दशकों से तनाव और परमाणु प्रतिस्पर्धा से भरे हुए हैं। जब दक्षिण कोरिया का राष्ट्रपति भारत जैसे बड़े लोकतंत्र के साथ अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए आता है, तो यह किम जोंग उन के लिए एक संभावित रणनीतिक खतरे का संकेत है। यह एक चेतावनी भी है।
किम जोंग उन की सक्रियता
इसी कारण किम जोंग उन इस समय अधिक सक्रिय नजर आ रहे हैं। पिछले महीने में उत्तर कोरिया ने चार बैलिस्टिक मिसाइलों का परीक्षण किया है, जो यह दर्शाता है कि प्योंगयांग अपनी सैन्य ताकत का प्रदर्शन कर रहा है और किसी भी संभावित खतरे के लिए तैयार है। दक्षिण कोरिया का भारत दौरा किम के लिए एक नया समीकरण प्रस्तुत करता है। उन्हें चिंता है कि कहीं भारत और दक्षिण कोरिया के बीच कोई नई हथियार डील न हो जाए, जो उनके खिलाफ हो।
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच संबंध
भारत और दक्षिण कोरिया के बीच विशेष रणनीतिक साझेदारी की शुरुआत 2010 में हुई थी, और अब यह साझेदारी कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विस्तारित हो चुकी है। रक्षा सहयोग, सेमीकंडक्टर, तकनीक, बैटरी, और इलेक्ट्रिक वाहनों जैसे मुद्दे दोनों देशों के बीच व्यापार को बढ़ावा दे रहे हैं। वर्तमान में, दोनों देशों के बीच व्यापार 30 मिलियन डॉलर से अधिक हो चुका है, और इसे और बढ़ाने की योजना है। यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह आठ साल बाद किसी दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति का भारत दौरा है।