दक्षिण कोरिया में पूर्व प्रधानमंत्री को 23 साल की सजा: क्या है विद्रोह का मामला?
दक्षिण कोरिया की अदालत का ऐतिहासिक फैसला
नई दिल्ली : दक्षिण कोरिया की एक अदालत ने बुधवार को एक महत्वपूर्ण निर्णय सुनाते हुए कहा कि वर्ष 2024 में तत्कालीन राष्ट्रपति यून सुक योल द्वारा लागू किया गया मार्शल लॉ संविधान के खिलाफ एक विद्रोह था। अदालत ने इसे लोकतांत्रिक ढांचे को कमजोर करने वाला कदम मानते हुए इसे सामान्य प्रशासनिक कार्रवाई नहीं माना।
पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को मिली कठोर सजा
हान डक-सू को 23 साल की सजा
इस मामले में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए पूर्व प्रधानमंत्री हान डक-सू को 23 वर्ष की कठोर सजा सुनाई गई है। वह यून सरकार के पहले वरिष्ठ अधिकारी हैं, जिन्हें दिसंबर 2024 में लागू किए गए मार्शल लॉ से जुड़े विद्रोह के आरोपों में दोषी ठहराया गया है। अदालत ने कहा कि हान ने सत्ता के दुरुपयोग में सक्रिय रूप से सहयोग किया।
यून सरकार में हान की स्थिति
यून सरकार में दूसरी सबसे बड़ी हैसियत
हान डक-सू को राष्ट्रपति यून सुक योल ने प्रधानमंत्री के रूप में नियुक्त किया था, और वह सरकार में दूसरे सबसे प्रभावशाली पद पर थे। मार्शल लॉ संकट के दौरान, वे उन तीन कार्यवाहक नेताओं में से एक थे, जिन्होंने शासन को संभालने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इस राजनीतिक संकट ने अंततः राष्ट्रपति यून के खिलाफ महाभियोग की प्रक्रिया को जन्म दिया।
राष्ट्रपति यून पर विद्रोह के आरोप
राष्ट्रपति यून पर भी गंभीर आरोप
मार्शल लॉ के लागू होने के बाद राष्ट्रपति यून सुक योल पर विद्रोह के आरोप लगाए गए और उन्हें अंततः पद से हटा दिया गया। वर्तमान में वह न्यायिक प्रक्रिया का सामना कर रहे हैं। यह फैसला उनके अन्य सहयोगियों के खिलाफ आने वाले निर्णयों की दिशा भी तय कर सकता है।
विद्रोह का गंभीरता से लिया जाना
विद्रोह को माना जाता है सबसे गंभीर अपराध
दक्षिण कोरिया के कानून के अनुसार, विद्रोह को सबसे गंभीर अपराधों में गिना जाता है। हाल ही में एक स्वतंत्र जांच अधिवक्ता ने राष्ट्रपति यून के लिए मृत्युदंड की मांग की है, यह कहते हुए कि उन्होंने सत्ता में बने रहने के लिए विद्रोह की साजिश रची।
यून के भविष्य पर फैसला
19 फरवरी को यून के भविष्य पर फैसला
अब सभी की नजरें सियोल सेंट्रल डिस्ट्रिक्ट कोर्ट पर टिकी हैं, जहां 19 फरवरी को राष्ट्रपति यून सुक योल के खिलाफ विद्रोह के आरोपों पर फैसला सुनाया जाएगा। यह निर्णय न केवल यून के राजनीतिक भविष्य, बल्कि दक्षिण कोरिया की लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है।