दिल्ली एयरपोर्ट पर UAE का बोइंग C17 ग्लोब मास्टर: भारत और UAE के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी
दिल्ली एयरपोर्ट पर यूएई का बोइंग C17 ग्लोब मास्टर विमान उतरा, जो भारत और यूएई के बीच बढ़ती रक्षा साझेदारी का प्रतीक है। इस लैंडिंग के पीछे की कहानी में भारत की रणनीतिक भूमिका और यूएई की सुरक्षा चिंताओं का जिक्र है। जानें कैसे यह घटना वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा रही है और दोनों देशों के बीच संबंधों में नया मोड़ ला रही है।
May 12, 2026, 20:08 IST
दिल्ली में UAE का बोइंग C17 ग्लोब मास्टर
रात के समय जब दिल्ली में शांति थी, तब इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक महत्वपूर्ण घटना घटी जिसने वैश्विक कूटनीति में हलचल मचा दी। यूएई वायुसेना का बोइंग C17 ग्लोब मास्टर 3, जो 51 मीटर से अधिक चौड़े पंख और 77 टन पेलोड ले जाने की क्षमता रखता है, भारत की धरती पर उतरा। यह लैंडिंग उस समय हुई जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी यूएई की यात्रा पर जाने वाले थे। संकट के समय मित्रता की असली परीक्षा होती है, और हाल के दिनों में मध्य पूर्व का माहौल तनावपूर्ण रहा है। ईरान ने यूएई के फुजेरा पेट्रोलियम क्षेत्र पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए हैं, जिससे तीन भारतीय नागरिक भी घायल हुए हैं, जिससे भारत की चिंता बढ़ गई है। ऐसे में यूएई को अपनी रक्षा सामग्री को तुरंत भरने की आवश्यकता थी और उसने भारत की ओर रुख किया। हालांकि आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन चर्चा है कि इस विमान में भारत की ऑर्डिनेंस फैक्ट्री द्वारा निर्मित रक्षा सामग्री लोड की गई है, जो यह दर्शाती है कि भारत यूएई की सुरक्षा के लिए तत्पर है।
भारत और UAE के बीच रक्षा सहयोग
भारत और यूएई दोनों ही C17 ग्लोब मास्टर विमानों का संचालन करते हैं। भारत के पास 11 और यूएई के पास 18 विमानों का बेड़ा है, जिससे दोनों देशों के बीच लॉजिस्टिक और रखरखाव में सहयोग बढ़ गया है। जब यूएई का विमान दिल्ली आता है, तो भारतीय ग्राउंड रूट उसे अपने विमान की तरह संभालते हैं। यह इंटरऑपरेबिलिटी भारत और यूएई के बीच रणनीतिक रक्षा साझेदारी का मूल आधार है। प्रधानमंत्री मोदी अपनी यूरोप यात्रा के दौरान यूएई में रुकेंगे और राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान से मुलाकात करेंगे। जनवरी 2026 में हस्ताक्षरित लेटर ऑफ इवेंट अब एक पूर्ण रक्षा समझौते में बदलने का समय आ गया है। इस साझेदारी के छह प्रमुख स्तंभ हैं: मिसाइल और ड्रोन का साझा उत्पादन, संयुक्त अनुसंधान और विकास, विशेष बलों का प्रशिक्षण, लॉजिस्टिक समर्थन, साइबर सुरक्षा, और आतंकवाद के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा।
भारत के एनएसए अजीत डोबाल की भूमिका
इस पूरी कहानी के पीछे भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोबाल का मास्टरमाइंडिंग भी है। हाल ही में उन्होंने यूएई और सऊदी अरब की गुप्त यात्राएं कीं, जिनका उद्देश्य ईरान-इजराइल तनाव के बीच भारत के हितों की रक्षा करना था। यह सुनिश्चित करना कि पश्चिमी एशिया में भारत का रणनीतिक प्रभाव इतना मजबूत हो जाए कि कोई भी ताकत उसे नजरअंदाज न कर सके।
भारत और UAE के बीच व्यापारिक संबंध
भारत और यूएई के बीच संबंध अब 100 बिलियन डॉलर के व्यापार को पार कर चुके हैं। 35 लाख भारतीय नागरिक यूएई की विकास में योगदान दे रहे हैं। भारत की ऊर्जा सुरक्षा का 25% हिस्सा यूएई से आता है। लेकिन अब यह संबंध केवल तेल और रेमिटेंस तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि यह टैंक, मिसाइल और रणनीतिक सुरक्षा का भी बन चुका है। भारत के हथियारों की बढ़ती मांग और यूएई की भारत से हथियारों की खरीदारी इस नई रक्षा साझेदारी का संकेत है। क्या भारत अपने तीन प्रमुख हथियार ब्रह्मोस, आकाश और पिनाका यूएई को सौंप सकता है? ब्रह्मोस, जो दुनिया की सबसे तेज सुपर सोनिक क्रूज मिसाइल है, इसकी गति इसे किसी भी रडार से बचने में सक्षम बनाती है।