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दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन: जिनपिंग का भारत दौरा और वैश्विक आर्थिक चिंताएँ

दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन में कई देशों के नेता शामिल होंगे, जिसमें चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत दौरा भी शामिल है। यह दौरा भारत-चीन संबंधों में तनाव के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। सम्मेलन में डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए संभावित निर्णयों और अमेरिका की चिंताओं पर चर्चा की जाएगी। जानें इस सम्मेलन से क्या उम्मीदें हैं और वैश्विक आर्थिक परिदृश्य पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारी

दिल्ली में 12 सितंबर से ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन होने जा रहा है, जिसमें रूस, चीन और अन्य देशों के नेता भाग लेंगे। सम्मेलन से पहले, पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम ने हाल की बैठकों के परिणामों पर सवाल उठाया। बीजेपी ने कांग्रेस को जवाब देते हुए 1947 से 2014 तक के आंकड़ों पर ध्यान देने का सुझाव दिया। चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग भी इस सम्मेलन में शामिल होने के लिए भारत आ रहे हैं, जो कि उनके सात साल बाद का भारत दौरा होगा। 


जिनपिंग का भारत दौरा और द्विपक्षीय वार्ता

क्या जिनपिंग का दौरा पुराने विवादों को सुलझा पाएगा?

शी जिनपिंग का यह दौरा भारत-चीन संबंधों में तनाव के बाद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। 2020 में गलवान घाटी में हुई झड़प के बाद से दोनों देशों के बीच संबंधों में खटास आई है। यदि 12 सितंबर को प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की द्विपक्षीय बैठक होती है, तो यह गलवान घटना के बाद दोनों नेताओं के बीच पहली आमने-सामने की बातचीत होगी। इसके अलावा, यह जिनपिंग का भारत में लगभग सात साल बाद पहला दौरा होगा।


ब्रिक्स सम्मेलन में आर्थिक निर्णय

क्या सम्मेलन में डॉलर पर निर्भरता कम करने के लिए कोई महत्वपूर्ण निर्णय होगा?

भारत इस वर्ष ब्रिक्स का अध्यक्ष है और 12-13 सितंबर को नई दिल्ली में सम्मेलन की मेज़बानी करेगा। इस कारण से, अमेरिका की नजरें भी दिल्ली पर हैं। सम्मेलन में ईरान की भागीदारी और अमेरिका की चिंताओं का विषय बन गया है। ब्रिक्स का विस्तार, डॉलर से दूरी बनाने की कोशिश और भारत की मेज़बानी में रूस, चीन और ईरान जैसे देशों का एक मंच पर आना अमेरिका के लिए चिंता का विषय है।


ईरान की भागीदारी और अमेरिका की चिंताएँ

क्या ईरान की मौजूदगी अमेरिका के लिए चिंता का कारण है?

हालांकि सम्मेलन में 11 देश शामिल हैं, लेकिन भारत, रूस, चीन और ईरान जैसे देशों की भागीदारी अमेरिका के लिए चिंता का विषय है। राष्ट्रपति ट्रंप पहले ही ब्रिक्स को लेकर अपनी नाराजगी व्यक्त कर चुके हैं और टैरिफ बढ़ाने की धमकी दे चुके हैं। इस बार सम्मेलन में वैश्विक दक्षिण की उभरती अर्थव्यवस्थाएँ एक साथ होंगी, जो अमेरिका के लिए चिंता का कारण बन रही हैं।