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नासा और इसरो के बीच सहयोग की नई संभावनाएं

नासा के वरिष्ठ अधिकारी अमित क्षत्रिय ने इसरो के साथ सहयोग की संभावनाओं पर प्रकाश डाला है। उन्होंने बताया कि दोनों संस्थानों के बीच पहले से ही असाधारण साझेदारी है और भविष्य में और अधिक सहयोग की उम्मीद है। निसार मिशन और आर्टेमिस समझौते के संदर्भ में, उन्होंने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। इस कार्यक्रम में एक्सिओम मिशन-4 के पायलट शुभांशु शुक्ला और नासा के पूर्व प्रशासक चार्ल्स बोल्डेन भी शामिल थे। जानें इसरो और नासा के बीच सहयोग के बारे में और क्या कुछ नया हो रहा है।
 

नासा के अधिकारी का बयान

(योषिता सिंह) न्यूयॉर्क, 20 सितंबर - नासा के भारतीय-अमेरिकी वरिष्ठ अधिकारी अमित क्षत्रिय ने बताया कि अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी और भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के बीच एक अद्वितीय साझेदारी है। उन्होंने भविष्य में और अधिक सहयोग की उम्मीद जताई। नासा के सहायक प्रशासक और मुख्य अभियंता क्षत्रिय ने ‘इंट्रेपिड म्यूजियम’ में ‘पीटीआई-भाषा’ के साथ बातचीत में कहा, “हम पहले से ही इसरो के साथ असाधारण सहयोग कर रहे हैं।”


इसरो की क्षमताओं की सराहना

क्षत्रिय ने कहा, “इसरो द्वारा विज्ञान अभियानों और मानव अंतरिक्ष उड़ान के क्षेत्र में जो क्षमता विकसित की जा रही है, उसे देखना अविश्वसनीय है। हम भविष्य में और अधिक सहयोग की आशा करते हैं।” उन्होंने नासा और इसरो के संयुक्त निसार (नासा-इसरो सिंथेटिक एपर्चर रडार) मिशन का उल्लेख किया, जो पृथ्वी का अध्ययन करने वाला उपग्रह है, जिसे जुलाई 2025 में लॉन्च किया जाएगा।


अंतरराष्ट्रीय सहयोग का महत्व

क्षत्रिय ने कहा कि नासा मानव अंतरिक्ष कार्यक्रमों में भी व्यापक साझेदारियां करता है और इसरो के साथ अपने अनुभव साझा करता है। उन्होंने अंतरिक्ष अन्वेषण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा, “अमेरिका के लिए इस क्षेत्र में नेतृत्व करना महत्वपूर्ण है, लेकिन यह हमारे मूल्यों के साथ होना चाहिए।”


आर्टेमिस समझौते पर भारत की भागीदारी

उन्होंने बताया कि भारत ने 70 से अधिक देशों के साथ आर्टेमिस समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं, जो नागरिक अंतरिक्ष अन्वेषण के लिए एक मार्गदर्शक सिद्धांत है। उन्होंने कहा, “यह एक प्रतिबद्धता है कि हम इस तरह अन्वेषण करेंगे जिसमें एक-दूसरे की संप्रभुता का सम्मान होगा।”


इंट्रेपिड म्यूजियम में कार्यक्रम

क्षत्रिय इंट्रेपिड म्यूजियम में आयोजित एक चर्चा में शामिल होने के लिए न्यूयॉर्क में थे। यह कार्यक्रम नासा के प्रोटोटाइप ऑर्बिटर ‘एंटरप्राइज’ के सार्वजनिक प्रदर्शन के 50 वर्ष पूरे होने के अवसर पर आयोजित किया गया था।


एक्सिओम मिशन-4 की चर्चा

इस चर्चा में नासा के पूर्व प्रशासक और अंतरिक्ष यात्री चार्ल्स एफ. बोल्डेन जूनियर तथा रिकॉर्डधारी अंतरिक्ष यात्री पेगी व्हिटसन भी शामिल थीं। व्हिटसन ने ग्रुप कैप्टन शुभांशु शुक्ला के साथ अपने सहयोग के अनुभव साझा किए। शुक्ला भारतीय वायुसेना के एक सम्मानित पायलट हैं और उन्होंने अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (आईएसएस) के लिए एक्सिओम मिशन-4 में पायलट के रूप में कार्य किया।


भारत का मंगल मिशन

बोल्डेन ने भारत के अंतरिक्ष कार्यक्रम में योगदान को भी रेखांकित किया, यह बताते हुए कि भारत ने अपने पहले प्रयास में मंगल ग्रह तक पहुंचने वाला पहला देश बनने का गौरव प्राप्त किया। भारत का पहला अंतरग्रहीय मंगल मिशन ‘मंगलयान’ नवंबर 2013 में प्रक्षिप्त किया गया था।