नेपाल की बाढ़ में कैसे बचा एक मकान? जानें इसकी खासियतें
नेपाल में बाढ़ का कहर
नई दिल्ली: नेपाल में आई भयंकर बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। तेज बहाव के साथ पानी और मलबा कई चीजों को अपने साथ बहा ले गया। इस बीच, एक दो मंजिला घर का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जो चारों ओर के पानी और मलबे के बावजूद अपनी जगह पर खड़ा रहा।
कैसे बचा यह मकान?
इस वीडियो में देखा जा सकता है कि मकान के चारों ओर पानी का तेज बहाव है और गाड़ियां बहती नजर आ रही हैं, जबकि पीछे से मलबा तेजी से गुजर रहा है। घर की निचली मंजिल का कुछ हिस्सा मलबे में दब गया, लेकिन पूरा मकान न तो गिरा और न ही बहा। लेकिन यह कैसे संभव हुआ? चलिए जानते हैं।
मकान की संरचना
सोशल मीडिया पर 'आर्किटेक्चर प्रेजेंटेशन' नामक चैनल ने ग्राफिक्स के माध्यम से इस मकान की बनावट को समझाने का प्रयास किया है। उनके अनुसार, यह घर आरसीसी यानी रिइनफोर्स्ड सीमेंट कंक्रीट से निर्मित है। इसमें पिलर, बीम और लिंटर जैसे हिस्सों में कंक्रीट के साथ पर्याप्त मात्रा में स्टील और सरिया का उपयोग किया गया है।
Explanation into how this house survived Nepal flood. pic.twitter.com/DAHHG0BSyh
— Architecture Presentation (@arcpresentation) August 30, 2026
बताया गया है कि तेज बहाव के दौरान कंक्रीट और स्टील का ढांचा पानी और मलबे के दबाव को सहन करने में मदद करता है। कंक्रीट दबाव को सहन करने में मजबूत होता है, जबकि स्टील खिंचाव और तनाव को संभालने में सहायक होता है। यही मजबूत ढांचा मकान को बाढ़ के बीच टिके रहने में मदद कर सकता है।
स्थान का महत्व
जगह ने भी निभाई अहम भूमिका
मकान की मजबूती के अलावा, इसकी लोकेशन भी एक महत्वपूर्ण कारण हो सकती है। कहा जा रहा है कि बाढ़ की मुख्य धारा घाटी के बीच से गुजर रही थी, जबकि यह मकान मुख्य बहाव से कुछ दूरी पर और थोड़ी ऊंचाई पर स्थित था। इससे पानी और मलबे का सीधा दबाव घर पर कम पड़ा होगा। हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर मकान के बचने की पूरी वैज्ञानिक वजह तय नहीं की जा सकती। विशेषज्ञों की जांच के बाद ही इसकी सही वजह सामने आ सकती है।
नेपाल में इस बाढ़ ने पुराने और कमजोर निर्माण वाले मकानों की सुरक्षा पर भी सवाल उठाए हैं। पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक पत्थर के मकान तेज बहाव में अधिक आसानी से क्षतिग्रस्त हो सकते हैं। ऐसे में मजबूत निर्माण तकनीक और सुरक्षित स्थान का चुनाव भविष्य में नुकसान को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।