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नेपाल में अंतरराष्ट्रीय सहयोग पर चर्चा: जयशंकर और वागले की बैठक

काठमांडू में विदेश मंत्री एस. जयशंकर और नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग के भविष्य पर विचारों का आदान-प्रदान किया। दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यवस्था में बदलाव, बहुपक्षीय सहयोग की चुनौतियों और क्षेत्रीय साझेदारियों की आवश्यकता पर चर्चा की। जयशंकर ने औपचारिक संस्थागत ढांचे की आवश्यकता और तदर्थ व्यवस्थाओं की ओर बढ़ते रुझान पर भी प्रकाश डाला। इस बैठक में आपदा प्रबंधन में भारत के सहयोग की सराहना भी की गई।
 

वैश्विक सहयोग की नई दिशा

(शिरीष बी प्रधान) काठमांडू, 23 अक्टूबर - विदेश मंत्री एस. जयशंकर और नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अंतरराष्ट्रीय सहयोग के भविष्य पर विचार साझा किए। नेपाल की एक समाचार एजेंसी के अनुसार, बृहस्पतिवार को ‘एनडीटीवी वर्ल्ड समिट 2026’ के एक सत्र में दोनों नेताओं ने वैश्विक व्यवस्था में परिवर्तन, बहुपक्षीय सहयोग की संभावनाओं और क्षेत्रीय साझेदारियों की आवश्यकता पर चर्चा की। इस सम्मेलन के ‘संप्रभु विकल्प की भू-राजनीति’ शीर्षक वाले सत्र में जयशंकर मुख्य वक्ता रहे।


बहुपक्षीयता की चुनौतियाँ

वागले ने बताया कि शीत युद्ध के बाद व्यापार और आर्थिक क्षेत्रों में बहुपक्षीयता को प्राथमिकता दी गई, लेकिन हाल के वर्षों में इसकी नींव कमजोर हुई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि क्या अंतरराष्ट्रीय सहयोग को औपचारिक संस्थागत ढांचे के माध्यम से मजबूत किया जाना चाहिए या साझेदार देशों के बीच आपसी समझ के जरिए। इस पर जयशंकर ने कहा कि पिछले दो दशकों में देश औपचारिक प्रतिबद्धताओं के बजाय व्यावहारिक सहयोग की ओर बढ़ रहे हैं।


संस्थागत ढांचे की आवश्यकता

जयशंकर ने कहा कि औपचारिक संस्थागत ढांचे के निर्माण में परामर्श, प्रशासनिक प्रक्रियाएं, वित्तीय प्रतिबद्धताएं और नियम बनाने में समय लगता है। उन्होंने यह भी बताया कि जहां औपचारिक ढांचे आवश्यक हैं, वहीं सभी सहयोग के रूपों को संस्थागत ढांचों से जोड़ना जरूरी नहीं है। ब्रिक्स और शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) की तुलना करते हुए उन्होंने कहा कि ब्रिक्स का कोई सचिवालय नहीं है और यह किसी चार्टर पर आधारित नहीं है।


तदर्थ व्यवस्थाओं की ओर बढ़ता रुझान

विदेश मंत्री ने ब्रिक्स और एससीओ के बीच संरचनात्मक भिन्नताओं को उजागर करते हुए कहा कि सभी सहयोग तंत्रों के लिए समान ढांचा होना आवश्यक नहीं है। जयशंकर ने कहा, "अगर आप मुझसे इस रुझान के बारे में पूछें, तो मैं कहूंगा कि यह स्पष्ट रूप से तदर्थ व्यवस्थाओं और समान विचारधारा वाले देशों के बीच साझेदारी की ओर बढ़ रहा है।" उन्होंने पिछले एक दशक में भारत द्वारा बनाए गए लगभग 50 समूहों का उल्लेख किया, जिसमें त्रिपक्षीय और चतुष्पक्षीय व्यवस्थाएं शामिल हैं।


आपदा प्रबंधन में सहयोग

इससे पहले, वागले ने 26 अगस्त को भोटेकोशी-त्रिशूली नदी में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद आपदा प्रबंधन में भारत द्वारा दिए गए सहयोग की सराहना की। उन्होंने कहा कि नेपाल भारत का आभारी है कि आपदा के कुछ ही घंटों के भीतर तत्काल सहायता उपलब्ध कराई गई।