नेपाल में बढ़ती सांप्रदायिक हिंसा: क्या है इसके पीछे का सच?
नेपाल में हिंसा का दौर जारी
नई दिल्ली: नेपाल में पिछले चार दिनों से सांप्रदायिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। यह घटनाएं सुनसरी जिले के देवानगंज से शुरू हुईं और अब इनरवा, जनकपुर, सिरहा, गोलबाजार, लहान जैसे कई शहरों तक फैल चुकी हैं।
हिंसा में आगजनी, तोड़फोड़, पथराव और पुलिस के साथ झड़पों की घटनाएं लगातार सामने आ रही हैं। अब तक तीन लोगों की जान जा चुकी है और कई अन्य घायल हुए हैं, जिनमें प्रदर्शनकारी, आम नागरिक और सुरक्षाकर्मी शामिल हैं। कई स्थानों पर सरकारी और निजी संपत्तियों को नुकसान पहुंचा है, जबकि दर्जनों दुकानें और वाहन जला दिए गए हैं।
विवाद की जड़ें
क्या है विवाद की वजह?
स्थानीय लोगों के अनुसार, यह विवाद बोलबम यात्रा के दौरान शुरू हुआ। देवानगंज में कांवड़ यात्रा के दौरान कुछ लोगों के बीच झड़प हो गई। आरोप है कि मुहर्रम के अवसर पर मंदिर की सार्वजनिक भूमि पर लगाए गए झंडे को हटाने को लेकर पहले से तनाव था। कई बार अनुरोध के बावजूद झंडा नहीं हटाया गया।
रविवार रात जब कांवड़िए उसी मैदान से गुजर रहे थे, तो उन पर अचानक हमला हुआ। इसके बाद दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए और स्थिति हिंसक हो गई। पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया, लेकिन हालात बिगड़ते गए।
कर्फ्यू और सुरक्षा उपाय
सेना ने संभाला मोर्चा, 6 शहरों में कर्फ्यू
स्थिति को नियंत्रित करने के लिए प्रशासन ने कई जिलों में कर्फ्यू लागू कर दिया है। संवेदनशील क्षेत्रों में सशस्त्र पुलिस और नेपाली सेना तैनात की गई है। सड़कों पर फ्लैग मार्च किया जा रहा है और हेलिकॉप्टर से हवाई निगरानी की जा रही है। इंटरनेट पर भी नजर रखी जा रही है ताकि अफवाहें न फैलें।
लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है। बाजार बंद हैं, स्कूल-कॉलेज भी बंद कर दिए गए हैं और सार्वजनिक परिवहन ठप है। हजारों लोग डर के कारण अपने घरों में ही हैं। व्यापारिक गतिविधियों के ठप होने से स्थानीय अर्थव्यवस्था पर भी नकारात्मक प्रभाव पड़ा है।
सरकार और राष्ट्रपति की अपील
राष्ट्रपति और सरकार की अपील
नेपाल के राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि देश में सदियों से चले आ रहे सामाजिक, धार्मिक और जातीय सौहार्द को बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने भाईचारे और राष्ट्रीय एकता की अपील की है।
प्रधानमंत्री बालेन शाह की सरकार ने उच्चस्तरीय बैठकें की हैं और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का आश्वासन दिया है। हालांकि, विपक्ष का आरोप है कि सरकार ने शुरुआत में ठोस कदम नहीं उठाए, जिससे हिंसा बढ़ी। विपक्ष का कहना है कि सरकार केवल बैठकों और बयानों तक सीमित रही।
सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि हिंसा भड़काने वालों की पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा रहा है। अब पूरे देश की नजर इस बात पर है कि सरकार स्थिति को कितनी जल्दी सामान्य कर पाती है।