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नेपाल में बाढ़ के बीच पुलिस का अद्भुत रेस्क्यू: 51 करोड़ का खजाना सुरक्षित

नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बाद, पुलिस ने एक अद्भुत रेस्क्यू ऑपरेशन में 51 करोड़ रुपये की संपत्ति को सुरक्षित निकाला। इस ऑपरेशन में 8 घंटे लगे, जिसमें नकद और सोना शामिल था। बाढ़ के कारण कई क्षेत्रों में तबाही मची है, और शवों को दफनाने का काम भी शुरू हो गया है। जानें इस संकट के बीच पुलिस की मेहनत और बाढ़ के हालात के बारे में।
 

नेपाल में बाढ़ का कहर


नई दिल्ली: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और भूस्खलन ने व्यापक तबाही मचाई है। अब स्थिति को सामान्य करने के प्रयास जारी हैं। इसी बीच, नेपाल पुलिस ने एक उल्लेखनीय कार्य किया है, जिसने सभी का ध्यान आकर्षित किया है। पुलिस ने बाढ़ में डूबे एक बैंक से 51 करोड़ रुपये की संपत्ति को सुरक्षित निकाल लिया है।


8 घंटे का रेस्क्यू ऑपरेशन

यह घटना एग्रीकल्चर डेवलपमेंट बैंक की त्रिशूली ढुंगे शाखा से संबंधित है। बाढ़ के कारण बैंक पूरी तरह से जलमग्न हो गई थी और वॉल्ट में करोड़ों की संपत्ति फंसी हुई थी। जैसे ही जानकारी मिली, नेपाल पुलिस ने तुरंत रेस्क्यू अभियान शुरू किया।


पुलिस ने लगभग 8 घंटे तक लगातार काम किया और वॉल्ट से करीब 1.5 करोड़ रुपये नकद और लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य का सोना निकाला। इसके साथ ही, बैंक के महत्वपूर्ण दस्तावेज और रिकॉर्ड भी सुरक्षित रूप से बाहर लाए गए।


निकाली गई सभी संपत्तियों को कड़ी सुरक्षा के बीच एक सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया गया। इस दौरान पुलिस ने सुनिश्चित किया कि बैंक की संपत्ति को कोई नुकसान न पहुंचे।


नेपाल पुलिस का वीडियो साझा

नेपाल पुलिस ने इस रेस्क्यू ऑपरेशन की जानकारी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा की है। पुलिस ने एक वीडियो भी जारी किया है, जिसमें उनके जवान बैंक के अंदर से नकद, सोने के बक्से और फाइलें निकालते हुए दिखाई दे रहे हैं। कीचड़ और पानी के बीच पुलिस ने इस खजाने को बड़ी सावधानी से बचाया।


करिब ८ घण्टाको निरन्तर प्रयास पछि कृषि विकास बैंक, त्रिशूली ढुंगे शाखाबाट करिब रु. १.५ करोड नगद, अनुमानित रु. ५० करोडको सुन तथा महत्वपूर्ण कागजात सुरक्षित स्थानमा सार्दै नेपाल प्रहरी । pic.twitter.com/vAOoOP2VT8

— Nepal Police (@NepalPoliceHQ) August 30, 2026



नेपाल में बाढ़ का संकट

यह अभियान उस समय चलाया गया जब नेपाल भयंकर बाढ़ और भूस्खलन से जूझ रहा है। बाढ़ ने कई क्षेत्रों में भारी नुकसान पहुंचाया है और सैकड़ों लोगों की जानें जा चुकी हैं।


रिपोर्ट के अनुसार, चितवन जिले में अधिकारियों ने उन बाढ़ पीड़ितों के शवों को सामूहिक रूप से दफनाना शुरू कर दिया है जिनकी पहचान नहीं हो पाई है। ये शव बाढ़ के पानी के साथ बहकर चितवन तक पहुंचे थे।


रासुवा घाटी से लगभग 200 किलोमीटर दूर देवघाट के जंगल में सैकड़ों कब्रें तैयार की गई हैं। अधिकारियों का कहना है कि कई शव इतनी बुरी तरह सड़ चुके थे कि उनकी पहचान करना संभव नहीं था।


देवघाट का यह जंगल आमतौर पर मॉर्निंग वॉक के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन फिलहाल इसे अस्थायी दफनाने की जगह बनाया गया है। चितवन के मुख्य जिला अधिकारी गणेश आर्यल ने कहा कि सड़ते शवों से लोगों की सेहत को खतरा हो सकता था, इसलिए उन्हें जल्द दफनाना आवश्यक था।