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नेपाल में बाढ़ से जिंदा निकली बुजुर्ग महिला: चमत्कार की कहानी

नेपाल में आई विनाशकारी बाढ़ ने कई लोगों की जान ली, लेकिन नुवाकोट से आई एक चमत्कारिक घटना ने सबको चौंका दिया। एक बुजुर्ग महिला, चंडिका श्रेष्ठा, को 10 दिनों बाद मलबे से जिंदा निकाला गया। परिवार ने उन्हें मृत मान लिया था, लेकिन उनकी अचानक वापसी ने सभी को हैरान कर दिया। जानें कैसे नेपाल पुलिस की टीम ने उन्हें बचाया और इस घटना ने अन्य लापता लोगों के परिवारों में उम्मीद जगाई।
 

नेपाल में बाढ़ का कहर


नई दिल्ली: नेपाल में आई भयंकर बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। इस आपदा में कई लोगों की जान गई है और कई लोग अब भी लापता हैं। इसी बीच, नुवाकोट से एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है, जहां एक बुजुर्ग महिला को लगभग 10 दिनों बाद मलबे से जिंदा निकाला गया।


चंडिका श्रेष्ठा का चमत्कार

महिला का नाम चंडिका श्रेष्ठा है। उनके परिवार ने लंबे समय तक कोई सूचना न मिलने के कारण उन्हें मृत मान लिया था। ऐसे में अचानक जिंदा मिलने की खबर उनके परिवार के लिए एक चमत्कार के समान थी।


परिवार ने मान ली थी मृत्यु

रिपोर्ट के अनुसार, नुवाकोट के बेत्रावती क्षेत्र में बाढ़ के तेज बहाव ने एक चार मंजिला इमारत को बुरी तरह क्षतिग्रस्त कर दिया था। इसी मलबे में चंडिका फंस गई थीं। कई दिनों तक उनका कोई पता नहीं चलने पर परिवार ने उनके जीवित रहने की उम्मीद छोड़ दी थी।


परिवार ने आठवें दिन उनकी मृत्यु के बाद होने वाली धार्मिक रस्में भी शुरू कर दी थीं। उन्हें क्या पता था कि चंडिका अभी भी मलबे के नीचे जीवन की लड़ाई लड़ रही हैं।


मलबे से आई आवाज

रेस्क्यू की कहानी भी बेहद अद्भुत है। जानकारी के अनुसार, नेपाल पुलिस की टीम सड़क निर्माण के काम के लिए क्षेत्र में पहुंची थी। इसी दौरान जवानों को मलबे में दबे घर के पास से हल्की रोने की आवाज सुनाई दी।


मिति २०८३ भदौ २० गते नेपाल प्रहरी, सशस्त्र प्रहरी बल, नेपाल र नेपाली सेनाको संयुक्त टोलीले जिल्ला नुवाकोट विदुर १० वेत्रावतीबाट १ जना महिलालाई सकुशल उद्धार गरेको छ । pic.twitter.com/Zcuj4bVXOJ

— Nepal Police (@NepalPoliceHQ) September 5, 2026



आवाज सुनते ही टीम ने तुरंत मलबा हटाना शुरू किया। जवानों ने हाथों से कीचड़ हटाया और फिर खिड़की तोड़कर घर के अंदर प्रवेश किया। काफी मेहनत के बाद वे चंडिका तक पहुंचने में सफल रहे और उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल लिया।


अस्पताल में उपचार

बाढ़ के कारण पूरा घर अपनी जगह से लगभग 100 मीटर तक खिसक गया था। मकान की अधिकांश मंजिलें मलबे में दब गई थीं और केवल ऊपरी हिस्सा ही दिखाई दे रहा था।


रेस्क्यू के बाद चंडिका को इलाज के लिए अस्पताल ले जाया गया, जहां उनकी चिकित्सा शुरू की गई। लगभग 10 दिन तक मलबे में फंसे रहने के बावजूद उनका जिंदा मिलना आपदा के बीच एक नई उम्मीद की किरण बन गया है।


चंडिका के परिवार के कुछ सदस्य अब भी लापता हैं। ऐसे में उनके बचने की खबर ने अन्य परिवारों में भी उम्मीद जगाई है कि मलबे में फंसे अन्य लोगों को भी सुरक्षित बाहर निकाला जा सकता है।