नेपाल में बाढ़ से तबाही: 1,204 मृतक और जलवायु परिवर्तन पर उठे सवाल
नेपाल में बाढ़ का कहर
नई दिल्ली: नेपाल में पिछले सप्ताह आई भयंकर बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है, जिसका असर अभी भी महसूस किया जा रहा है। 26 अगस्त को अचानक आई बाढ़ के बाद से बुधवार, 2 सितंबर तक मृतकों की संख्या 1,204 तक पहुंच गई है, जबकि लगभग 4,216 लोग अब भी लापता हैं। राहत कार्यकर्ता हिमालयी क्षेत्रों में लापता व्यक्तियों की खोज में जुटे हैं।
मृतकों की संख्या और राहत कार्य
नेपाल पुलिस के अनुसार, चितवन में 348, नवलपरासी पूर्व में 217, नवलपरासी पश्चिम में 190 और नुवाकोट में 155 शव बरामद किए गए हैं। इसके अतिरिक्त, गोरखा से 66, धादिंग से 59, रसुवा से 45 और तनाहूं से 38 शव मिले हैं। अब सबसे बड़ी चुनौती लापता लोगों की खोज और प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाना है।
जलवायु परिवर्तन का प्रभाव
जलवायु परिवर्तन से जुड़ी आपदा बता रहे बालेन शाह
नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह ने भोटेकोशी नदी की बाढ़ को जलवायु परिवर्तन से संबंधित घटना बताया है। उन्होंने हिमालय में बढ़ते जलवायु जोखिमों पर वैश्विक सहयोग की अपील की है। शाह ने एक सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि हिमालय के तापमान में 1.8 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि ने इस आपदा को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेषज्ञों का मानना है कि ऊंचाई वाले क्षेत्रों से बर्फ और चट्टानों का गिरना पानी के तेज बहाव का कारण बना, जिसने निचले इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। प्रधानमंत्री ने कहा कि अब सरकार का ध्यान पुनर्वास पर है।
मुआवजे की मांग
तीन देशों से मुआवजे की मांग, UN जाने की तैयारी
नेपाल अब इस आपदा के लिए केवल सहायता नहीं, बल्कि मुआवजे की भी मांग कर रहा है। काठमांडू ने चीन, भारत और अमेरिका को बड़े ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जक देशों में शामिल करते हुए उनसे जलवायु नुकसान की भरपाई में योगदान देने की अपील की है। नेपाल के विदेश मंत्री शिशिर खनाल के अनुसार, जिन देशों का जलवायु संकट में योगदान अधिक है, उनकी जिम्मेदारी बनती है कि वे उन कमजोर देशों की मदद करें, जो कम उत्सर्जन के बावजूद प्राकृतिक आपदाओं का बड़ा नुकसान झेल रहे हैं। नेपाल इस मुद्दे को अंतरराष्ट्रीय मंच पर ले जाने की तैयारी कर रहा है।
आर्थिक नुकसान का आकलन
तबाही की भरपाई में लग सकते हैं 4-5 अरब डॉलर
26 अगस्त को भोटेकोशी नदी बेसिन में आई बाढ़ ने रसुवा, नुवाकोट और धाडिंग जिलों के कई हिस्सों को प्रभावित किया। घरों, सड़कों, पुलों और पनबिजली परियोजनाओं को भारी नुकसान हुआ, जिससे बड़ी संख्या में लोग बेघर हो गए। नेपाल ने इस आपदा को 'हिमालयन सुनामी' तक कहा है। नेपाल के वित्त मंत्री स्वर्णिम वागले ने बताया कि नुकसान की भरपाई और पुनर्निर्माण के लिए लगभग 4 से 5 अरब डॉलर की आवश्यकता हो सकती है, जो देश की अर्थव्यवस्था के लगभग 10 प्रतिशत के बराबर है।
UNGA में बाढ़ मुआवजे की मांग
UNGA में बाढ़ मुआवजे की मांग उठा सकते हैं बालेन शाह
'द काठमांडू पोस्ट' के अनुसार, प्रधानमंत्री बालेन्द्र शाह 81वीं संयुक्त राष्ट्र महासभा में शामिल होने न्यूयॉर्क जा सकते हैं। सरकार इस प्रस्ताव पर चर्चा कर रही है ताकि शाह खुद रसुवा की बाढ़ और जलवायु मुआवजे का मुद्दा अंतरराष्ट्रीय मंच पर उठा सकें। पहले UNGA में नेपाल का प्रतिनिधित्व विदेश मंत्री शिशिर खनाल को करना था, लेकिन बाढ़ के बाद योजना में बदलाव की संभावना है। महासभा की आम बहस सितंबर के तीसरे और चौथे सप्ताह में होगी। नेपाल इस मंच पर यह बताने की कोशिश करेगा कि कम उत्सर्जन के बावजूद हिमालयी देश ग्लेशियरों के पिघलने, अस्थिर पहाड़ी ढलानों और ग्लेशियर से जुड़ी बाढ़ का बड़ा खामियाजा भुगत रहा है।