नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही: 1,000 से अधिक लोगों की जान गई
नेपाल में विनाशकारी बाढ़ की रिपोर्ट
नेपाल में हाल ही में आई विनाशकारी बाढ़ के संबंध में एक चिंताजनक रिपोर्ट सामने आई है। 'HiRISK' द्वारा जारी की गई इस रिपोर्ट में बताया गया है कि 26 अगस्त को आई इस भीषण बाढ़ से पहले ही सैटेलाइट तस्वीरों में हिमस्खलन और ग्लेशियर के ढहने के संकेत देखे गए थे। यदि समय पर उचित आपदा प्रबंधन और प्रभावी 'अर्ली-वॉर्निंग सिस्टम' लागू किए गए होते, तो सैकड़ों लोगों की जान बचाई जा सकती थी। रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि घटना से पहले ग्लेशियर की सतह पर दरारें स्पष्ट रूप से देखी गई थीं।
बाढ़ के कारण और प्रभाव
HiRISK की रिपोर्ट में कहा गया है कि बेहतर आपदा प्रबंधन और प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों के माध्यम से लोगों की जान बचाई जा सकती थी, क्योंकि 26 अगस्त को नेपाल में आई बाढ़ में मरने वालों की संख्या 1,000 से अधिक हो गई है। रिपोर्ट में यह भी पाया गया कि सैटेलाइट तस्वीरों में हिमस्खलन के संकेत और ग्लेशियर के ढहने से पहले उसकी सतह पर दरारें देखी गई थीं।
चेतावनी प्रणालियों की कमी
रिपोर्ट में कहा गया है कि इस क्षेत्र में हाल ही में प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियाँ स्थापित की गई थीं, लेकिन ग्लेशियर से जुड़े खतरों के लिए कोई सक्रिय EWS नहीं था। प्रारंभिक हिमस्खलन की तेज़ गति को देखते हुए, पारंपरिक चेतावनी प्रणालियों से मिलने वाला समय बहुत कम था, जिससे लोगों को सुरक्षित निकालना मुश्किल हो गया। यदि चेतावनी का समय 10 मिनट या उससे अधिक होता, तो बड़ी संख्या में लोगों की जान बचाई जा सकती थी।
भूकंपीय संकेत और भविष्य की तैयारी
इसमें यह भी कहा गया कि इस बड़े पैमाने पर हलचल से 4 से अधिक तीव्रता का भूकंपीय संकेत मिला, जिससे यह संकेत मिलता है कि भविष्य में भूकंप-आधारित प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों में ऐसे भूकंपीय सिस्टम का उपयोग किया जा सकता है।
मरने वालों की संख्या और बचाव कार्य
अधिकारियों के अनुसार, मरने वालों की संख्या अब 1,050 के पार पहुँच गई है, और सुरक्षा बलों ने आठ जिलों से और शव बरामद किए हैं। नेशनल डिज़ास्टर रिस्क रिडक्शन एंड मैनेजमेंट अथॉरिटी (NDRRMA) के अनुसार, लगभग 4,000 लोग अभी भी लापता हैं, जबकि करीब 12,000 लोगों को सुरक्षित निकाला गया है। भारत ने भी बाढ़ के बाद अपने 163 नागरिकों को सुरक्षित निकाला है।
भारत की सहायता और बचाव प्रयास
भारत की 19 सदस्यों वाली एक विशेष फोरेंसिक टीम ने काठमांडू में अपने कार्य शुरू कर दिए हैं। इसके अलावा, चिलिमे में हाइड्रोपावर टनल में खोज और बचाव कार्यों में मदद के लिए एक टनल रेस्क्यू टीम को तैनात किया गया है। टनल रेस्क्यू टीम को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुँचने में कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा है।