×

नेपाल में बाढ़ से हुई तबाही: जीवित बचे लोगों की कहानियाँ

नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने भारी तबाही मचाई है, जिसमें 734 लोगों की जान गई और 2500 से अधिक लोग लापता हैं। बचे हुए लोग अपने अनुभव साझा कर रहे हैं, जिसमें घरों का बर्बाद होना और प्रियजनों का खोना शामिल है। जानिए इस आपदा के बाद जीवित बचे लोगों की दिल दहला देने वाली कहानियाँ और उनकी स्थिति।
 

नेपाल में बाढ़ का कहर

नेपाल में 26 अगस्त को आई बाढ़ ने व्यापक तबाही मचाई है। इस अचानक आई आपदा ने हजारों लोगों की जिंदगी को प्रभावित किया है। रिपोर्टों के अनुसार, इस भीषण बाढ़ में 734 लोगों की जान चली गई है, जबकि 2500 से अधिक लोग लापता हैं। बचे हुए लोग अब उस भयानक मंजर के बारे में अपनी कहानियाँ साझा कर रहे हैं। कई लोगों ने अपने घरों को पूरी तरह से बर्बाद होते देखा, तो कुछ ने अपने परिवार के सदस्यों को खो दिया।


बचे लोगों की स्थिति

जो लोग इस बाढ़ में बच गए हैं, उनके पास अब रहने के लिए कोई सुरक्षित स्थान नहीं है। उनके चेहरों पर डर और तबाही की छवि स्पष्ट दिखाई दे रही है। कुछ लोग अपने प्रियजनों की तलाश में हैं। इस आपदा से बचे लोगों ने उस दिन की घटनाओं के बारे में क्या कहा है।


घर की बर्बादी

एक स्थानीय निवासी ने कहा, 'हमने अपने घर को नदी से काफी दूर बनाया था, लेकिन अचानक नदी का पानी बढ़ गया और हमारे घर में घुस गया। मेरा घर पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। न केवल मेरा, बल्कि मेरे पड़ोसी का घर भी बह गया। हमें अब तक सरकार से कोई सहायता नहीं मिली है। हमें आर्थिक मदद की आवश्यकता है। नेपाल राहत कोष में बहुत सारा पैसा दान किया गया है, लेकिन हमें मदद मिलने में समय लग सकता है।'


दोस्त की बाढ़ में बहने की कहानी

स्थानीय निवासी तमांग ने बताया कि पानी तेजी से बढ़ रहा था और लोग इधर-उधर भाग रहे थे। जब वह गिरते थे, तो उन्हें लगता था कि यह उनकी जिंदगी का आखिरी पल हो सकता है। अंततः वह पहाड़ी की चोटी पर पहुंचे, जहां उन्होंने अपने दोस्तों को बाढ़ में बहते देखा। तमांग ने कहा, 'जब मेरे दोस्त मेरी आंखों के सामने लहरों में बह गए, तो मैं कुछ नहीं कर सका।'


जंगल में बची जान

राजू बुधाथोकी, जो बाढ़ से बचे, ने बताया कि जब बाढ़ आई, तो उन्होंने तुरंत बाहर भागने का निर्णय लिया। पुलिस चौकी की ओर जाते समय उन्होंने पुलिसकर्मियों को भी भागते देखा। जब उन्होंने पीछे मुड़कर देखा, तो उनका घर बाढ़ में बह रहा था। उन्होंने कहा, 'मैं जंगल में पहुंचा, जहां मेरी जान बची। जंगल की ओर भागना मेरे लिए जीवनदायिनी निर्णय था। यह सब किसी बुरे सपने जैसा लगता है।'


तबाही का मंजर

प्रकाश गौतम ने कहा कि तेज आवाज के बाद पूरा तिमुरे अंधेरे में डूब गया और आसमान पर काले बादल छा गए। जान बचाने के लिए वह जंगल की ओर भागे, लेकिन भागते समय उनके पैर में चोट आई। उन्होंने बताया कि जंगल से उन्होंने बाढ़ में बहते शव और तबाह बस्ती देखी। इसके बाद वह सेना के हेलिकॉप्टर से सुरक्षित निकले। उन्होंने कहा, 'मैं नई जिंदगी लेकर वापस आया हूं।'