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नेपाल में राजनीतिक संकट: प्रधानमंत्री बालेन शाह के बयान पर विवाद

नेपाल की राजनीति में हाल ही में प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक बयान ने विवाद को जन्म दिया है, जिसके चलते देशभर में विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। विपक्षी दलों और छात्र संगठनों ने उनके इस्तीफे की मांग की है। बालेन शाह का बयान भारत-नेपाल सीमा विवाद से संबंधित था, जिसने राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया। विदेश मंत्रालय ने उनके बयान को गलत समझा गया बताया है, लेकिन इसके बावजूद विरोध प्रदर्शन जारी हैं। इस स्थिति ने नेपाल की राजनीतिक स्थिरता को चुनौती दी है।
 

नेपाल की राजनीति में उथल-पुथल

नेपाल की राजनीतिक स्थिति इस समय गंभीर संकट का सामना कर रही है। प्रधानमंत्री बालेन शाह के एक हालिया बयान ने देशभर में राजनीतिक विवाद को जन्म दिया है। संसद में भारत-नेपाल सीमा विवाद पर चर्चा के दौरान उनके बयान ने विपक्षी दलों और छात्र संगठनों को आक्रोशित कर दिया है, जिसके चलते उनके इस्तीफे की मांग उठने लगी है।


बालेन शाह का समर्थन अब संकट में

कुछ समय पहले तक बालेन शाह को व्यापक जनसमर्थन प्राप्त था, लेकिन अब उन्हें अपने ही कार्यकाल में विरोध का सामना करना पड़ रहा है। विवाद का मुख्य कारण भारत-नेपाल सीमा के कालापानी, लिपुलेख और लिंपियाधुरा क्षेत्र हैं, जिन पर दोनों देशों के बीच लंबे समय से मतभेद बने हुए हैं।


संसद में बयान से बढ़ा विवाद

प्रधानमंत्री बालेन शाह ने संसद में कहा कि सीमा विवाद केवल एकतरफा नहीं है और नेपाल की तरफ से भी कुछ स्थानों पर सीमा पार होने की घटनाएं हुई हैं। उनके इस बयान को कई राजनीतिक दलों ने नेपाल के राष्ट्रीय रुख के खिलाफ माना, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ गया।


काठमांडू में छात्रों और विपक्ष का विरोध

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस बयान के बाद काठमांडू में छात्र संगठनों ने 'हमारी संप्रभुता बचाओ' के नारे के साथ विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री पर 'देश विरोधी बयान' देने का आरोप लगाया। इसके साथ ही विपक्षी दलों और राजनीतिक संगठनों ने भी रैलियां निकालकर उनके इस्तीफे की मांग को तेज कर दिया। संसद में भी इस मुद्दे पर हंगामा देखने को मिला, जहां विपक्षी सांसदों ने प्रधानमंत्री से माफी मांगने और बयान वापस लेने की मांग की।


विदेश मंत्रालय की सफाई के बावजूद तनाव जारी

नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बाद में एक बयान जारी कर कहा कि प्रधानमंत्री के शब्दों को गलत तरीके से समझा गया है और उनका आशय केवल स्थानीय सीमा प्रबंधन से जुड़े मुद्दों से था। मंत्रालय ने यह भी बताया कि भारत और नेपाल के बीच सीमा विवाद पर तकनीकी स्तर पर बातचीत पहले से चल रही है। हालांकि इस सफाई के बावजूद राजनीतिक तनाव कम नहीं हुआ और विरोध प्रदर्शन जारी रहे।