नेपाल में सांप्रदायिक हिंसा: क्या है पाकिस्तान की भूमिका?
सुनसरी जिले में हुई सांप्रदायिक हिंसा
नई दिल्ली: नेपाल के सुनसरी जिले में हाल ही में हुई सांप्रदायिक हिंसा ने भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों को सतर्क कर दिया है। इस उपद्रव के पीछे पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई (ISI) की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। नेपाल की खुफिया एजेंसी ने गृह मंत्रालय को प्रारंभिक रिपोर्ट सौंपी है, जिसके आधार पर सीमावर्ती क्षेत्रों में विदेशी नेटवर्क और संदिग्ध फंडिंग की गहन जांच शुरू की गई है। इस हिंसा से पहले पाकिस्तानी मूल के मौलाना मोहम्मद इलियास घुमान और काठमांडू के इमाम मुफ्ती अबु बकर कासमी की संदिग्ध उपस्थिति देखी गई थी।
मदरसों की फंडिंग पर जांच
नेपाल के सीमावर्ती क्षेत्रों में नई मस्जिदों और मदरसों को मिलने वाली विदेशी फंडिंग अब जांच के दायरे में है। भारत और नेपाल की सुरक्षा एजेंसियों ने पहले भी ऐसे मामलों का खुलासा किया है, जहां नेपाली नागरिकों का इस्तेमाल आईएसआई के जासूसी नेटवर्क के लिए किया गया। उदाहरण के लिए, दिल्ली पुलिस ने नेपाली नागरिक प्रभात कुमार चौरसिया को गिरफ्तार किया था, जिसके माध्यम से भारतीय सिम कार्ड पाकिस्तान भेजे गए थे।
विदेशी मौलानाओं की संदिग्ध गतिविधियाँ
इस हिंसा से पहले पाकिस्तानी मौलाना मोहम्मद इलियास घुमान और काठमांडू के इमाम मुफ्ती अबु बकर कासमी की संदिग्ध उपस्थिति दर्ज की गई थी। आशंका है कि विदेशी धार्मिक प्रचारकों ने भारत-नेपाल सीमा के संवेदनशील जिलों का दौरा करके माहौल को बिगाड़ने का प्रयास किया। हालांकि, इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है, लेकिन सीमावर्ती क्षेत्रों में अचानक बढ़ी गतिविधियों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
कप्तानगंज में भड़की हिंसा
26 जुलाई की रात सुनसरी जिले के देवगंज ग्रामीण नगरपालिका के कप्तानगंज क्षेत्र में दो समुदायों के बीच विवाद शुरू हुआ। धार्मिक झंडे लगाने और तेज आवाज में डीजे बजाने को लेकर यह मामूली झगड़ा देखते ही देखते हिंसक झड़प में बदल गया। हालात बेकाबू होने पर सुरक्षा बलों को गोलियां चलानी पड़ीं, जिससे कई लोगों की मौत और दर्जनों लोग घायल हुए। इस तनाव के बाद आसपास के क्षेत्रों में भी हिंसा फैल गई, जिसे नियंत्रित करने के लिए प्रशासन को कर्फ्यू लागू करना पड़ा। नेपाल सरकार ने सुनसरी हिंसा की विस्तृत जांच के लिए एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया है। सीमा पार से भारत की शांति को भंग करने की इस संभावित साजिश का असली चेहरा जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।