पश्चिम एशिया में अमेरिका-ईरान तनाव: युद्ध की स्थिति में ईरान
अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव
पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच तनाव में लगातार वृद्धि हो रही है। दोनों देशों के बीच हो रही सैन्य गतिविधियों ने खाड़ी क्षेत्र का माहौल और भी गर्म कर दिया है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा है कि उनका देश अब अमेरिका के साथ 'आर-पार की लड़ाई' में है। उनके इस बयान के बाद क्षेत्र में स्थिति और भी तनावपूर्ण हो गई है।
ईरान के जवाबी हमले
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने यह दावा किया है कि उसने पश्चिम एशिया में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर जवाबी हमले किए हैं। यह जानकारी उस समय आई है जब अमेरिका ने लगातार नौ रातों तक ईरान के विभिन्न सैन्य ठिकानों और शहरों पर हवाई हमले किए हैं। दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय की चिंता को भी बढ़ा दिया है।
खाड़ी देशों में हलचल
इस तनाव का प्रभाव अब खाड़ी के अन्य देशों पर भी दिखाई दे रहा है। बहरीन ने आरोप लगाया है कि ईरानी ड्रोन ने उसके एयर नेविगेशन सिस्टम को निशाना बनाया, हालांकि इससे हवाई यातायात पर कोई असर नहीं पड़ा। कुवैत ने भी हमलों की पुष्टि की है। राष्ट्रपति पेजेशकियन ने कहा कि वर्तमान स्थिति में ईरान खुलकर युद्ध लड़ रहा है और नागरिकों को इसके परिणामों के लिए तैयार रहना चाहिए। उन्होंने धैर्य बनाए रखने की अपील भी की।
हॉर्मुज स्ट्रेट पर चिंता
ओमान के तट के पास, हॉर्मुज स्ट्रेट के निकट एक जहाज पर अज्ञात प्रोजेक्टाइल से हमले की सूचना मिली है। ब्रिटेन की समुद्री सुरक्षा एजेंसी ने कहा है कि हमले में जहाज को नुकसान पहुंचा है, लेकिन चालक दल के सभी सदस्य सुरक्षित हैं। हॉर्मुज स्ट्रेट विश्व के सबसे महत्वपूर्ण तेल आपूर्ति मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में बढ़ते तनाव का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर भी पड़ा, जिससे कच्चे तेल की कीमतें कुछ समय के लिए 90 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गईं।
अमेरिका का सैन्य अभियान जारी
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने जानकारी दी है कि उसने लगातार नौवीं रात ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान जारी रखा। अमेरिका के अनुसार, इस दौरान ईरान के सैन्य कमांड सेंटर, एयर डिफेंस सिस्टम, मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, तटीय निगरानी केंद्र और संचार नेटवर्क को निशाना बनाया गया, ताकि हॉर्मुज स्ट्रेट में ईरान की सैन्य क्षमता को कमजोर किया जा सके। इसी बीच, अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस संघर्ष में जान गंवाने वाले अपने दो सैनिकों की पहचान भी सार्वजनिक की है। दोनों सैनिक जॉर्डन में अमेरिकी मिशन के तहत तैनात थे। अमेरिकी सेना का कहना है कि इस संघर्ष में अब तक उसके 17 सैनिकों की मौत हो चुकी है।