पाकिस्तान और इजरायल के बीच संबंधों का रहस्य
पाकिस्तान-इजरायल संबंधों की जटिलता
पाकिस्तान और इजरायल के बीच संबंधों की स्थिति काफी जटिल है। इन दोनों देशों के बीच आधिकारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं, लेकिन सैन्य और राजनीतिक स्तर पर कई बार संपर्क स्थापित हो चुका है। पाकिस्तान ने इजरायल को अब तक मान्यता नहीं दी है और वह फलस्तीन के मुद्दे पर इजरायल के खिलाफ खड़ा है। हाल ही में, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने इजरायल को 'कैंसर' करार दिया, लेकिन कुछ समय बाद उन्होंने यह पोस्ट हटा दी।
रक्षा मंत्री का ट्वीट और उसकी पृष्ठभूमि
यह सवाल उठता है कि जब दोनों देशों के बीच कोई औपचारिक संबंध नहीं हैं, तो ख्वाजा आसिफ को ट्वीट हटाने की आवश्यकता क्यों पड़ी? क्या उन्हें किसी की नाराजगी का डर था? आइए इस सवाल का उत्तर खोजने की कोशिश करते हैं और देखते हैं कि इजरायल और पाकिस्तान के बीच संबंधों की वास्तविकता क्या है।
1993 से शुरू हुआ संबंधों में बदलाव
पाकिस्तान का गठन 14 अगस्त 1947 को हुआ, और इजरायल की स्वतंत्रता 14 मई 1948 को घोषित हुई। तब से दोनों देशों के बीच कोई आधिकारिक संबंध नहीं बने। हालाँकि, 1993 में पाकिस्तान के राजदूत जमशेद मार्कर और इजरायल के प्रधानमंत्री यित्जाक राबिन के बीच एक बैठक हुई, जिसमें द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा की गई।
पाकिस्तानी विदेश मंत्री की इजरायली अधिकारियों से मुलाकात
1 सितंबर 2005 को, पाकिस्तान के विदेश मंत्री खुर्शीद महमूद कसूरी ने इस्तांबुल में इजरायल के विदेश मंत्री सिल्वान शालोम से मुलाकात की। इस बैठक को ऐतिहासिक माना गया, लेकिन जब इसका खुलासा हुआ, तो पाकिस्तान में कट्टरपंथियों ने इसका विरोध किया।
भूकंप के समय इजरायल की मदद
8 अक्टूबर 2005 को जम्मू और कश्मीर में आए भूकंप के दौरान, इजरायल ने पाकिस्तान को सहायता भेजी, जिसके लिए पाकिस्तान ने इजरायल का आभार व्यक्त किया।
मुशर्रफ का इजरायल के साथ संबंध सुधारने का प्रयास
पूर्व राष्ट्रपति मुशर्रफ ने इजरायल के साथ संबंध सुधारने की कोशिश की। 2003 में उन्होंने कहा कि पाकिस्तान इजरायल के अस्तित्व को मान्यता देता है। इसके बाद इजरायल और पाकिस्तान के बीच संबंधों पर चर्चा शुरू हुई।
अरब देशों में इजरायल की स्वीकार्यता
2020 में, अमेरिका के नेतृत्व में इजरायल, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन के बीच संबंधों को सामान्य करने के लिए अब्राहम समझौता हुआ। इस दौरान पाकिस्तान में भी इजरायल के साथ संबंध सुधारने की कोशिशें शुरू हुईं।
इजरायल के साथ संबंधों की मांग
2022 में, एक अमेरिकी-पाकिस्तानी प्रतिनिधिमंडल ने इजरायल का दौरा किया, जहां इजरायली राष्ट्रपति ने उनका स्वागत किया। इस दौरान इमरान खान की सरकार को आलोचना का सामना करना पड़ा।
ख्वाजा आसिफ का ट्वीट हटाने का कारण
पाकिस्तान के सेना प्रमुख असीम मुनीर को अमेरिका का समर्थन प्राप्त है, और संभव है कि वे इजरायल के साथ संपर्क में हों। ख्वाजा आसिफ का ट्वीट इस संबंध में बाधा बन सकता था, इसलिए इसे हटाया गया।