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पाकिस्तान और रूस के बीच बढ़ते संबंध: शहबाज शरीफ का संभावित मॉस्को दौरा

पाकिस्तान और रूस के बीच संबंधों में तेजी से सुधार हो रहा है, जिसमें शहबाज शरीफ का संभावित मॉस्को दौरा शामिल है। दोनों देशों ने हाल ही में संयुक्त सैन्य अभ्यास किया है, जिसका उद्देश्य आतंकवाद रोधी क्षमताओं को बढ़ाना है। इस बीच, रूस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं, खासकर जब पाकिस्तान को आतंकिस्तान कहा जाता है। जानें इस महत्वपूर्ण घटनाक्रम के बारे में और अधिक जानकारी।
 

पाकिस्तान और रूस के रिश्तों में नई गर्माहट


नई दिल्ली: पाकिस्तान और रूस के बीच संबंधों में एक नई ऊर्जा देखने को मिल रही है। पश्चिमी देशों से अलग-थलग पड़ चुके पाकिस्तान ने अब रूस के साथ अपने सैन्य और कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ दोस्ती बढ़ाने की कोशिशें अब फलती-फूलती नजर आ रही हैं।


शहबाज शरीफ का संभावित मॉस्को दौरा

एक रिपोर्ट के अनुसार, पीएम शहबाज शरीफ जल्द ही रूस की राजधानी मॉस्को का दौरा कर सकते हैं। इस दौरे की तैयारियों में दोनों देशों ने सक्रियता दिखाई है। कहा जा रहा है कि रूस को यह चिंता है कि अमेरिका एक बार फिर अफगानिस्तान में अपनी पकड़ मजबूत कर सकता है, जिसके चलते राष्ट्रपति पुतिन अफगानिस्तान के मामलों में अधिक सक्रिय हो गए हैं।


हाल ही में मॉस्को में हुई एक महत्वपूर्ण बैठक में रूस ने तालिबान और पाकिस्तान के बीच सुलह की कोशिश की है। इस बैठक में भारत ने अफगानिस्तान की संप्रभुता का समर्थन किया। उल्लेखनीय है कि पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच संबंध वर्तमान में बहुत खराब हैं। पाकिस्तान ने हाल ही में अफगानिस्तान में हवाई हमले किए हैं, जिससे कई नागरिकों की जान गई है। वहीं, इस्लामाबाद का आरोप है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान के आतंकी अफगानिस्तान से हमले कर रहे हैं और तालिबान सरकार उन्हें संरक्षण दे रही है।


अफगान सीमा के निकट संयुक्त सैन्य अभ्यास

इस बीच, पाकिस्तान और रूस की सेनाओं ने अफगान सीमा के पास खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के चित्राल क्षेत्र में दो हफ्ते तक चलने वाला संयुक्त सैन्य अभ्यास समाप्त किया है। यह दोनों देशों के बीच नौवां सैन्य अभ्यास था, जिसका उद्देश्य युद्ध के अनुभव को साझा करना, आतंकवाद रोधी क्षमताओं को बढ़ाना और दोनों सेनाओं के बीच तालमेल को मजबूत करना था।


इस अभ्यास में पाकिस्तान की स्पेशल फोर्सेज और रूस के 201वें मिलिट्री बेस के जवान शामिल हुए। दोनों देशों के सैनिकों ने ड्रोन युद्ध का भी अभ्यास किया। पाकिस्तान में रूसी राजदूत ने इस अभ्यास और आपसी सहयोग की सराहना की है।


रूस के रवैये पर उठते सवाल

विश्लेषकों का मानना है कि रूस का यह रवैया कई गंभीर प्रश्न उठाता है। एक ओर, पाकिस्तान को आतंकिस्तान कहा जाता है, जहां के आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद भारतीय सीमा पर हमले करते हैं और जिन्हें पाकिस्तानी सेना का समर्थन प्राप्त है। ऐसे में, रूस का पाकिस्तान की सेना के साथ आतंकवाद रोधी अभ्यास करना भारत की चिंताओं को बढ़ाता है, क्योंकि रूस भारत का एक पुराना और विश्वसनीय रणनीतिक साझेदार रहा है।