पाकिस्तान का ऊर्जा संकट: क्या ईरान-अमेरिका तनाव से बढ़ी मुश्किलें?
पाकिस्तान में ऊर्जा संकट की गंभीरता
नई दिल्ली: पाकिस्तान इस समय एक गंभीर ऊर्जा संकट का सामना कर रहा है। वैश्विक स्तर पर मध्यस्थता का दावा करने वाला यह देश अब अपने घरेलू मोर्चे पर बड़ी चुनौतियों का सामना कर रहा है। हाल ही में एक जानकारी सामने आई है, जिसने सभी को चौंका दिया है।
संकट का मुख्य कारण
मध्य पूर्व में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव के कारण स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद हो गया है। इस मार्ग से दुनिया के लगभग 20 प्रतिशत कच्चे तेल का परिवहन होता है। पाकिस्तान अपनी अधिकांश तेल आवश्यकताओं के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर है। इस मार्ग के बंद होने और जहाजों की कमी के कारण सप्लाई पूरी तरह से प्रभावित हो गई है।
पेट्रोलियम मंत्री का चिंताजनक बयान
पाकिस्तान के पेट्रोलियम मंत्री अली परवेज मलिक ने हाल ही में एक टीवी शो में देश की स्थिति पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि देश में केवल 5 से 7 दिनों का कच्चा तेल बचा है। पेट्रोल का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है, जबकि डीजल के भंडार 26-28 दिनों और एलपीजी के 15 दिनों के आसपास हैं।
मंत्री ने चेतावनी दी कि ईरान-अमेरिका संघर्ष के जल्द समाप्त होने की कोई संभावना नहीं है, जिससे वैश्विक तेल बाजार में अनिश्चितता बनी हुई है। दुबई क्रूड की कीमतें पहले कभी इतनी ऊंची नहीं गई थीं। पाकिस्तान ने एयरलाइंस के लिए ईंधन की कमी को लेकर NOTAM जारी किया है, जो स्थिति की गंभीरता को दर्शाता है।
सख्त उपायों की तैयारी
ईंधन की बचत के लिए शाहबाज शरीफ सरकार कड़े कदम उठाने पर विचार कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पेट्रोल-डीजल की खपत को कम करने के लिए लॉकडाउन जैसी पाबंदियां लगाई जा सकती हैं। सरकारी और निजी दफ्तरों में कर्मचारियों को घर से काम करने के लिए कहा जा सकता है।
स्कूलों और कॉलेजों को बंद करके पढ़ाई को ऑनलाइन मोड में स्थानांतरित करने की योजना बनाई जा रही है। लोगों से निजी वाहनों का कम उपयोग करने और कार शेयरिंग को बढ़ावा देने की अपील की जा रही है।
महंगाई और आर्थिक दबाव
पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट और महंगाई से जूझ रहा है। इस नई समस्या के कारण पेट्रोल-डीजल की कीमतों की समीक्षा अब हर हफ्ते की जा सकती है। जहाजों का बीमा खर्च भी कई गुना बढ़ गया है, जिसका बोझ आम जनता पर पड़ेगा। परिवहन महंगा होने से सब्जियों, फलों, राशन और दवाओं की कीमतें भी बढ़ेंगी।
जो देश दूसरों के बीच मध्यस्थता का दावा करता है, वह अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने में असफल नजर आ रहा है। विदेशी मुद्रा भंडार की कमी और आईएमएफ की शर्तों के बीच यह संकट पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।