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पाकिस्तान का गिलगित-बाल्टिस्तान को पांचवां प्रांत बनाने का प्रस्ताव: क्या है इसके पीछे की कहानी?

पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान को अपने पांचवे प्रांत के रूप में मान्यता देने के लिए एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पेश किया है। विधानसभा ने सर्वसम्मति से इस प्रस्ताव को पारित किया है, जिसमें क्षेत्र के निवासियों को समान अधिकार देने की मांग की गई है। यह कदम पाकिस्तान के आंतरिक संकटों के बीच उठाया गया है, और भारत ने इस पर अपनी आपत्ति जताई है। जानें इस प्रस्ताव के पीछे की कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

पाकिस्तान ने उठाया बड़ा कदम


नई दिल्ली: पाकिस्तान ने गिलगित-बाल्टिस्तान को अपने पांचवे प्रांत के रूप में मान्यता देने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। शुक्रवार को, क्षेत्र की विधानसभा ने सर्वसम्मति से एक प्रस्ताव पारित किया, जिसमें केंद्र सरकार से संविधान में संशोधन कर इसे पूर्ण प्रांतीय दर्जा देने की मांग की गई। यदि यह प्रस्ताव संसद द्वारा स्वीकृत होता है, तो पाकिस्तान के प्रशासनिक नक्शे में महत्वपूर्ण बदलाव होगा और जम्मू-कश्मीर विवाद में एक नया मोड़ आएगा।


विधानसभा का प्रस्ताव

प्रस्ताव में यह उल्लेख किया गया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान के निवासियों को पंजाब, सिंध, बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा के नागरिकों के समान सभी संवैधानिक, राजनीतिक और लोकतांत्रिक अधिकार मिलने चाहिए। इसमें नेशनल असेंबली, सीनेट और अन्य संघीय संस्थाओं में प्रतिनिधित्व की भी मांग की गई है।


इसके साथ ही, यह भी कहा गया है कि यह दर्जा "अस्थायी" होगा और जम्मू-कश्मीर विवाद के भविष्य के समाधान पर निर्भर करेगा। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय जिम्मेदारियों का हवाला देते हुए इस मुद्दे पर दरवाजा खुला रखा है। इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री, विधानसभा अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, विपक्ष के नेता और निर्दलीय सदस्यों ने हस्ताक्षर किए हैं। अब इसे इस्लामाबाद में आगे की कार्रवाई के लिए भेजा गया है।


मुद्दा उठने का समय

यह कदम ऐसे समय पर उठाया गया है जब पाकिस्तान कई आंतरिक संकटों का सामना कर रहा है। बलूचिस्तान में सुरक्षा स्थिति खराब है और खैबर पख्तूनख्वा में चरमपंथी हमलों में वृद्धि हुई है। आलोचकों का मानना है कि सरकार इन समस्याओं से ध्यान हटाने के लिए इस लंबे समय से लंबित प्रस्ताव को फिर से सक्रिय कर रही है। वर्तमान में, गिलगित-बाल्टिस्तान का शासन सीमित स्व-शासन के तहत चल रहा है और इसे चार प्रांतों जैसा संवैधानिक दर्जा नहीं मिला है।


चुनाव के बाद का प्रस्ताव

यह घटनाक्रम 7 जून को हुए विधानसभा चुनावों के कुछ हफ्ते बाद सामने आया है, जिसमें धांधली के आरोप लगे थे। बिलावल भुट्टो की PPP सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी और अमजद हुसैन मुख्यमंत्री बने।


किसी को बहुमत न मिलने पर PPP और शहबाज शरीफ की PML-N ने गठबंधन सरकार बनाई। इस समझौते के तहत PPP को मुख्यमंत्री और स्पीकर का पद मिला, जबकि PML-N को गवर्नर और डिप्टी स्पीकर का पद मिला। नई सरकार ने सत्ता में आते ही प्रांत का दर्जा देने वाला प्रस्ताव पारित कर दिया।


2019 की योजना का पुनरुत्थान

यह विचार नया नहीं है। अगस्त 2019 में भारत द्वारा अनुच्छेद 370 और 35A हटाने के बाद, इमरान खान की सरकार ने भी ऐसा प्रस्ताव पेश किया था, लेकिन वह आगे नहीं बढ़ सका। वर्तमान सरकार का तर्क है कि इस क्षेत्र को औपचारिक रूप से संवैधानिक ढांचे में लाना आवश्यक है।


भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि गिलगित-बाल्टिस्तान सहित पूरा जम्मू-कश्मीर भारत का अभिन्न हिस्सा है। नई दिल्ली ने कहा है कि पाकिस्तान द्वारा अपने कब्जे वाले क्षेत्रों का दर्जा बदलने के एकतरफा प्रयासों की कोई कानूनी वैधता नहीं है।