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पाकिस्तान का मीडिया इजरायल के खिलाफ: क्या है इसके पीछे की कूटनीति?

पाकिस्तान का मीडिया इस समय इजरायल के खिलाफ एकजुट हो रहा है, जिसमें प्रमुख समाचार पत्रों का रुख स्पष्ट रूप से इजरायल के खिलाफ है। डॉन और पाकिस्तान टुडे जैसे अखबारों ने इजरायल पर गंभीर आरोप लगाए हैं, जिसमें ईरान के साथ शांति वार्ता को कमजोर करने की कोशिश का जिक्र है। इसके अलावा, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ने भी इजरायल के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया है। क्या यह केवल मीडिया की राय है या इसके पीछे कोई गहरी कूटनीतिक सोच है? जानें इस लेख में।
 

पाकिस्तान का मीडिया और इजरायल के खिलाफ रुख


मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच, पाकिस्तान का मीडिया इस मुद्दे पर सक्रियता से अपनी आवाज उठा रहा है। ईरान और संभावित सीजफायर वार्ता से पहले, प्रमुख पाकिस्तानी समाचार पत्रों और चैनलों का रुख स्पष्ट रूप से इजरायल के खिलाफ है। यह स्थिति यह सवाल उठाती है कि क्या यह केवल मीडिया की राय है या इसके पीछे कोई गहरी कूटनीतिक सोच भी है।


डॉन का संपादकीय और इजरायल पर आरोप

पाकिस्तान के प्रमुख समाचार पत्र डॉन ने अपने संपादकीय में इजरायल पर आरोप लगाया है कि वह ईरान के साथ होने वाली शांति वार्ता को कमजोर करने का प्रयास कर रहा है। अखबार के अनुसार, इजरायल इस बात से नाराज है कि ईरान के खिलाफ उसकी और अमेरिका की संयुक्त रणनीति सफल नहीं हो पाई।


इजरायल की नीतियों पर आलोचना

संपादकीय में यह भी उल्लेख किया गया है कि इजरायल के भीतर उसकी नीतियों पर आलोचना हो रही है, क्योंकि वह अपने सैन्य लक्ष्यों को प्राप्त नहीं कर सका। इसके परिणामस्वरूप, वह लेबनान में हमलों के माध्यम से अपना गुस्सा निकाल रहा है, जहां हिज़्बुल्लाह को निशाना बनाते हुए आम नागरिकों को नुकसान पहुंचाया जा रहा है।


दाहिये सिद्धांत का उल्लेख

डॉन ने अपने लेख में 'दाहिये सिद्धांत' का भी जिक्र किया, जिसके तहत किसी क्षेत्र को पूरी तरह से नष्ट करने की रणनीति अपनाई जाती है। अखबार का दावा है कि इस नीति के तहत लेबनान में आम लोगों को निशाना बनाया गया, जो अंतरराष्ट्रीय कानून के खिलाफ है। यह भी कहा गया कि इजरायल लंबे समय से ऐसी रणनीति अपनाता रहा है।


अमेरिका और ट्रंप पर टिप्पणी

अखबार ने यह भी आरोप लगाया कि इजरायल ने डोनाल्ड ट्रंप को गलत जानकारी देकर ईरान के खिलाफ सख्त रुख अपनाने के लिए प्रेरित किया। लेख में यह सवाल उठाया गया है कि क्या ट्रंप वास्तव में 'अमेरिका फर्स्ट' की नीति पर चलेंगे या इजरायल के प्रभाव में निर्णय लेंगे, भले ही इससे क्षेत्र में अस्थिरता बढ़े।


पाकिस्तान टुडे की चिंता

दूसरे प्रमुख अखबार पाकिस्तान टुडे ने भी इजरायल के लेबनान पर हमलों को चिंताजनक बताया। अखबार का कहना है कि यह हमला किसी गलतफहमी का परिणाम नहीं है, क्योंकि सीजफायर की घोषणा के समय ही यह स्पष्ट किया गया था कि इसमें लेबनान भी शामिल है।


जियो न्यूज और ईरान का रुख

जियो न्यूज ने ईरान के नेता मोजतबा खामेनेई के बयान को प्रमुखता से दिखाया, जिसमें उन्होंने कहा कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन अगर उस पर हमला होता है तो वह जिम्मेदार लोगों को नहीं बख्शेगा। वहीं, द नेशन ने बताया कि अगर इजरायल लेबनान में सीजफायर का उल्लंघन जारी रखता है, तो ईरान इस समझौते से पीछे हट सकता है।


पाकिस्तान के रक्षा मंत्री का बयान

शांति वार्ता से पहले, पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने सोशल मीडिया पर इजरायल के खिलाफ कड़े शब्दों का इस्तेमाल किया। उन्होंने इजरायल को 'मानवता के लिए खतरा' और 'कैंसर' कहा और लेबनान में हो रहे हमलों को नरसंहार बताया। हालांकि, इस बयान पर इजरायल की तीखी प्रतिक्रिया के बाद उन्होंने अपना पोस्ट हटा लिया।