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पाकिस्तान का रक्षा उद्योग: जेएफ-17 विमानों की बिक्री में तेजी

पाकिस्तान ने हाल ही में अपने रक्षा उद्योग में महत्वपूर्ण बदलाव किए हैं, जिसमें जेएफ-17 लड़ाकू विमानों की बिक्री में तेजी आई है। इंडोनेशिया, जो अपनी वायु सेना को मजबूत करने की योजना बना रहा है, पाकिस्तान से 40 से अधिक जेएफ-17 विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है। यह घटनाक्रम भारत के लिए चिंता का विषय बन गया है, खासकर जब नई दिल्ली और जकार्ता के बीच अन्य रक्षा सौदों की बातचीत चल रही है। जानें इस स्थिति के पीछे की पूरी कहानी और पाकिस्तान के बढ़ते रक्षा संबंधों के बारे में।
 

पाकिस्तान की नई रक्षा रणनीति

पाकिस्तान में हालात तेजी से बदल रहे हैं। एक समय जो व्यक्ति राशन के लिए उधार मांगता था, अब वह बाउंसर्स के साथ घूमता है और अत्याधुनिक हथियारों की दुकान खोल चुका है। यह बदलाव पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण मोड़ है, जो पहले अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सहायता पर निर्भर था, अब अरब देशों में एक रक्षा शक्ति बनने की दिशा में बढ़ रहा है।


इंडोनेशिया, जो दक्षिण पूर्व एशिया का सबसे बड़ा देश है, अपनी वायु सेना को अगले कई दशकों के लिए मजबूत करने की योजना बना रहा है। इसके तहत वह पाकिस्तान से 40 से अधिक जेएफ-17 लड़ाकू विमानों की खरीद पर विचार कर रहा है। जेएफ-17 वही विमान है जिसका मुकाबला भारत के तेजस से होता है।


भारत की चिंता और इंडोनेशिया का निर्णय

इंडोनेशिया के रक्षा मंत्री शफरी शमसोद्दीन और पाकिस्तान वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल जहीर अहमद बाबर सिद्धू के बीच हाल ही में हुई बैठक के बाद यह मामला और भी गंभीर हो गया है। पाकिस्तान ने इस बैठक में 40 जेएफ-17 विमानों की पेशकश की, जो पाकिस्तान और चीन द्वारा संयुक्त रूप से विकसित किए गए हैं।


भारत, जो दक्षिण चीन सागर में चीन की बढ़ती सैन्य गतिविधियों का सामना कर रहा है, इंडोनेशिया को एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार मानता है। ऐसे में पाकिस्तान और चीन के साथ इंडोनेशिया के बढ़ते रक्षा संबंधों ने नई दिल्ली में चिंता पैदा कर दी है।


पाकिस्तान के रक्षा सौदे

पाकिस्तान ने हाल के वर्षों में हथियार निर्यात को अपनी कूटनीतिक और आर्थिक रणनीति का हिस्सा बना लिया है। उसने लीबिया के साथ लगभग 4 अरब डॉलर का रक्षा सौदा किया है, जिसमें 16 जेएफ-7 थंडर लड़ाकू विमानों और 12 सुपर मुशक ट्रेनर विमानों की आपूर्ति शामिल है।


इसके अलावा, सूडान को करीब 1.5 अरब डॉलर के ड्रोन और वायु रक्षा प्रणालियों की आपूर्ति की जा रही है, जिसकी फंडिंग सऊदी अरब कर रहा है। पाकिस्तान के लिए यह एक महत्वपूर्ण अवसर है, क्योंकि वह अपने पुराने कर्ज चुकाने के लिए हथियारों की बिक्री को एक विकल्प के रूप में देख रहा है।