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पाकिस्तान की आतंकवाद पर नई साजिशें और अमेरिका का जवाब

पाकिस्तान में आतंकवाद की गतिविधियाँ और उनकी साजिशों पर अमेरिका का प्रभाव चर्चा का विषय बना हुआ है। हाल ही में, पाकिस्तान और चीन को संयुक्त राष्ट्र में एक बड़ा झटका लगा, जब अमेरिका ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी को प्रतिबंधित सूची में डालने के प्रस्ताव को रोक दिया। यह घटनाक्रम पाकिस्तान के सेना प्रमुख की रणनीतियों के लिए एक बड़ा झटका है। जानें कैसे पाकिस्तान की योजनाएँ विफल हुईं और भारत ने इस मामले में सक्रिय कूटनीति का प्रदर्शन किया।
 

पाकिस्तान की आतंकवाद से जुड़ी गतिविधियाँ

पाकिस्तान में आतंकवादी गतिविधियों का संचालन खुलेआम होता है, और यह स्पष्ट है कि वहां की सरकार और सेना इनका समर्थन करती है। ये गतिविधियाँ विशेष रूप से भारत के खिलाफ होती हैं। बावजूद इसके, पाकिस्तान अपने इन कृत्यों को छुपाने के लिए निरंतर नए प्रोपेगेंडा का सहारा लेता है। हाल ही में, जब पाकिस्तान ने अपने मित्र चीन के माध्यम से भारत को फंसाने की कोशिश की, तो अमेरिका ने ऐसा कदम उठाया कि पाकिस्तान की सारी योजनाएँ ध्वस्त हो गईं। यह स्थिति उस कहावत की याद दिलाती है, जिसमें कहा गया है कि 'सौ चूहे खाकर बिल्ली हज को चली'। पाकिस्तान, जो आतंकवाद के लिए कुख्यात है, अब भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अमेरिका ने उसकी इस कोशिश को नाकाम कर दिया।


यूएन में पाकिस्तान और चीन को झटका

पाकिस्तान और चीन को संयुक्त राष्ट्र में एक बड़ा झटका लगा है। आमिर खान ने बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और उसकी मजीद ब्रिगेड को यूएन की प्रतिबंधित सूची में डालने के प्रस्ताव को रोक दिया है। अमेरिका ने स्पष्ट किया है कि इन संगठनों का अलकायदा या आईएसआईएस से कोई ठोस संबंध नहीं है। यह अमेरिका का बयान पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर के लिए एक बड़ा झटका है, जो लगातार बलूच संगठनों को भारत से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। बीएलए द्वारा पाकिस्तानी सैनिकों की हत्या का आरोप भी पाकिस्तान भारत पर लगाता रहा है, जबकि भारत इन आरोपों को खारिज कर रहा है।


संयुक्त राष्ट्र में आतंकवाद पर प्रस्ताव

पाकिस्तान और चीन ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की 1267 आतंकवाद प्रतिबंध व्यवस्था के तहत बीएलए और मस्जिद ब्रिगेड को प्रतिबंधित सूची में डालने का प्रस्ताव रखा था। यह व्यवस्था अलकायदा और आईएसआईएस से जुड़े संगठनों पर वैश्विक प्रतिबंध लगाने के लिए उपयोग की जाती है। पाकिस्तान ने सोचा कि यदि बीएलए और मस्जिद ब्रिगेड को प्रतिबंधित किया गया, तो ये संगठन आतंकवादी घोषित हो जाएंगे और भारत को आतंकवाद के मुद्दे पर घेरने का प्रोपेगेंडा शुरू होगा। भारत ने इस मामले में सक्रिय कूटनीति का प्रदर्शन किया, और फ्रांस ने भी भारत का समर्थन किया।