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पाकिस्तान की कूटनीति का सच: ईरान-अमेरिका विवाद में सिर्फ एक संदेशवाहक

पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थता का दावा किया, लेकिन पूर्व राजदूत संजय सुधीर ने इसे केवल एक संदेशवाहक की भूमिका बताया। ईरान ने पाकिस्तानी धरती पर अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने से इनकार किया है, जिससे पाकिस्तान की कूटनीतिक कोशिशें विफल हो गई हैं। इस बीच, पाकिस्तान आर्थिक संकट का सामना कर रहा है और उसे यूएई को 3.5 अरब डॉलर लौटाने की आवश्यकता है। जानें इस स्थिति का पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार पर क्या प्रभाव पड़ेगा।
 

पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल


नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव के दौरान, पाकिस्तान ने खुद को मध्यस्थ बताने का प्रयास किया। प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और आर्मी चीफ असीम मुनीर के नेतृत्व में इस्लामाबाद ने दावा किया कि वह दोनों देशों के बीच शांति वार्ता का आयोजन कर रहा है, लेकिन अब यह दावा पूरी तरह से उजागर हो गया है।


संजय सुधीर का खुलासा

भारत के पूर्व राजदूत संजय सुधीर, जो चार वर्षों तक संयुक्त अरब अमीरात में कार्यरत रहे, ने एक इंटरव्यू में पाकिस्तान की कूटनीति की सच्चाई को उजागर किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि पाकिस्तान कभी भी वास्तविक मध्यस्थ नहीं रहा, बल्कि केवल एक संदेशवाहक की भूमिका निभा रहा था।


मध्यस्थता बनाम संदेशवाहक

सुधीर ने बताया कि मध्यस्थता तब होती है जब दोनों पक्ष एक मध्यस्थ के सामने बैठकर बातचीत करते हैं, लेकिन ईरान और अमेरिका के मामले में ऐसा कभी नहीं हुआ। पाकिस्तान केवल संदेशों का आदान-प्रदान कर रहा था। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने खुद को मध्यस्थ बताने का प्रयास किया, लेकिन वास्तविकता इससे बहुत भिन्न थी।


ईरान का स्पष्ट इनकार

ईरान ने पाकिस्तानी धरती पर किसी भी अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल से मिलने से साफ इनकार कर दिया है। वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के अनुसार, तेहरान ने अमेरिका की शर्तों को 'अस्वीकार्य' करार दिया है, जिससे पाकिस्तान के राजनयिक प्रयास पूरी तरह विफल हो गए हैं।


आर्थिक संकट में और बढ़ी मुश्किलें

यह कूटनीतिक विफलता पाकिस्तान के लिए एक और चुनौती बन गई है, क्योंकि देश पहले से ही आर्थिक संकट का सामना कर रहा है। संयुक्त अरब अमीरात ने पाकिस्तान से एक महीने के भीतर अपने बकाया कर्ज चुकाने की मांग की है।


डॉन अखबार की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान ने इस महीने के अंत तक यूएई को 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर लौटाने का निर्णय लिया है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने इसे 'राष्ट्रीय गरिमा' बनाए रखने का कदम बताया है।


विदेशी मुद्रा भंडार पर प्रभाव

सुधीर ने कहा कि अबू धाबी पाकिस्तान के प्रति पहले उदार रहा है, लेकिन हर चीज की एक सीमा होती है। अब वह समय आ गया है जब पाकिस्तान को अपने कर्ज चुकाने होंगे।


पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार वर्तमान में लगभग 16.3 अरब डॉलर है। 3.5 अरब डॉलर चुकाने से इसमें लगभग 18 प्रतिशत की कमी आ सकती है, जिससे आयात क्षमता और बाहरी सुरक्षा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा।