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पाकिस्तान की चीन यात्रा: अमेरिका-ईरान विवाद में मध्यस्थता की नई कोशिश

पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के प्रयासों में चीन का रुख किया है। प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर बीजिंग पहुंचे हैं, जहां वे चीनी अधिकारियों से मुलाकात कर रहे हैं। इससे पहले, आसिम मुनीर ने तेहरान में ईरानी नेताओं के साथ गुप्त बैठकें की थीं। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य 30 दिनों के सीजफायर प्रस्ताव पर ईरान की सहमति प्राप्त करना है। जानिए इस विवाद का भारत पर क्या असर पड़ सकता है।
 

पाकिस्तान की मुश्किलें बढ़ीं


नई दिल्ली: पाकिस्तान अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता के प्रयासों में फंस गया है। न तो अमेरिका उसकी बात सुन रहा है और न ही ईरान जनरल आसिम मुनीर और शहबाज शरीफ की अपील पर बातचीत के लिए तैयार है। ऐसे में पाकिस्तान ने मदद के लिए चीन का रुख किया है।


शहबाज शरीफ और आसिम मुनीर का चीन दौरा

चीन की सरकारी मीडिया के अनुसार, पाकिस्तानी प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर बीजिंग पहुंचे हैं। दोनों नेता चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और अन्य उच्च अधिकारियों से मिलकर अमेरिका-ईरान विवाद का समाधान निकालने की कोशिश कर रहे हैं। यह यात्रा इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि इससे पहले आसिम मुनीर ईरान का दौरा कर चुके हैं।


तेहरान में महत्वपूर्ण बैठकें

बीजिंग जाने से पहले, आसिम मुनीर पाकिस्तान के गृह मंत्री मोहसिन नकवी के साथ अचानक तेहरान पहुंचे। वहां उन्होंने ईरानी सैन्य अधिकारियों और शीर्ष नेताओं के साथ कई गुप्त बैठकें कीं। इस दौरे का मुख्य उद्देश्य पाकिस्तान और कतर द्वारा तैयार किए गए 30 दिनों के सीजफायर प्रस्ताव पर ईरान की सहमति प्राप्त करना था।


शहबाज शरीफ का बयान

चीन में बैठक के दौरान, शहबाज शरीफ ने कहा कि वर्तमान में पूरी दुनिया एक नाजुक स्थिति में है। उन्होंने कहा, "पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता में ईमानदारी से भूमिका निभाई है। फील्ड मार्शल आसिम मुनीर तेहरान में थे और वे इस चीन दौरे को भी छोड़ना नहीं चाहते थे।" शरीफ ने चीन का आभार व्यक्त करते हुए कहा, "चीजें सही दिशा में बढ़ रही हैं। शांति स्थापित करने में चीन के सहयोग के लिए मैं उसका धन्यवाद करता हूं।"


चीन की भूमिका

चीन इस विवाद को सुलझाने में शुरू से ही सक्रिय रहा है। पिछले महीने पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में अमेरिका-ईरान के बीच बैठक का आयोजन किया था, लेकिन कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। पहले 10 दिनों के सीजफायर में भी चीन ने ईरान को 20 से अधिक फोन कॉल करके मनाने की कोशिश की थी। अब पाकिस्तान एक बार फिर चीन की मदद से प्रयास कर रहा है।


भारत पर प्रभाव

अमेरिका और ईरान के बीच समझौता न होने से तेल आपूर्ति पर संकट गहरा गया है। कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज अभी भी पूरी तरह से खुल नहीं पाया है, जिससे भारत समेत कई देशों में चिंता बढ़ गई है।