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पाकिस्तान की 'ड्रेस डिप्लोमेसी': आसिम मुनीर का दोहरा रूप

पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर ने इस्लामाबाद के नूर खान एयरबेस पर ईरान और अमेरिका के प्रतिनिधियों का स्वागत करते समय दो अलग-अलग छवियों का प्रदर्शन किया। एक ओर, उन्होंने ईरान के प्रतिनिधियों के सामने सैन्य वर्दी में सख्त छवि प्रस्तुत की, जबकि अमेरिकी उपराष्ट्रपति के स्वागत के समय उन्होंने सिविल सूट पहना। यह 'ड्रेस डिप्लोमेसी' का एक अनूठा उदाहरण है, जो पाकिस्तान की कूटनीतिक रणनीति को दर्शाता है।
 

कूटनीति की नई परिभाषा


इस्लामाबाद के नूर खान एयरबेस पर एक ही दिन में दो भिन्न तस्वीरें देखने को मिलीं, जिन्होंने कूटनीति की नई परिभाषा प्रस्तुत की। एक ओर जहां पाकिस्तान के सेना प्रमुख आसिम मुनीर सख्त सैन्य रूप में थे, वहीं दूसरी ओर उन्होंने एक नरम राजनयिक छवि भी प्रस्तुत की। यह केवल स्वागत का तरीका नहीं था, बल्कि एक सोची-समझी रणनीति थी, जिसे अब 'ड्रेस डिप्लोमेसी' के उदाहरण के रूप में देखा जा रहा है।


ईरानी प्रतिनिधिमंडल का स्वागत

सुबह के समय जब ईरान का उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल, जिसमें संसद स्पीकर मोहम्मद बागेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अरागची शामिल थे, एयरबेस पर पहुंचे, तब आसिम मुनीर पूरी सैन्य वर्दी में नजर आए। उनके कंधों पर सितारे और छाती पर मेडल थे, जो उन्हें एक सख्त सैन्य कमांडर की छवि दे रहे थे।


उन्होंने मेहमानों का स्वागत किया, लेकिन उनके हावभाव से यह स्पष्ट था कि सुरक्षा की जिम्मेदारी पाकिस्तानी सेना के हाथ में है।


अमेरिकी उपराष्ट्रपति का स्वागत

कुछ घंटों बाद जब अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस का विमान वहां उतरा, तो आसिम मुनीर एक सिविल सूट में नजर आए, जो उन्हें एक राजनयिक नेता की छवि दे रहा था।


ईरान के प्रतिनिधियों के सामने सैन्य वर्दी पहनना एक खास संदेश देने के लिए था। पाकिस्तान और ईरान के रिश्ते कई संवेदनशील मुद्दों से जुड़े हैं, जैसे सीमा विवाद और ऊर्जा सहयोग।


अमेरिका के साथ संतुलन

अमेरिका के साथ पाकिस्तान का रिश्ता अलग है। यहां सैन्य ताकत दिखाने के बजाय एक संतुलित और कूटनीतिक छवि पेश करना ज्यादा महत्वपूर्ण था। जेडी वेंस के स्वागत के समय सूट पहनकर मुनीर ने यह संकेत दिया कि पाकिस्तान एक आधुनिक और जिम्मेदार साझेदार है।


इस कदम से यह भी दिखाने की कोशिश की गई कि देश केवल सेना के भरोसे नहीं, बल्कि राजनीतिक रूप से भी परिपक्व है।


'ड्रेस डिप्लोमेसी' का महत्व

इस घटनाक्रम को 'ड्रेस डिप्लोमेसी' का एक बेहतरीन उदाहरण माना जा रहा है। यानी कपड़ों के माध्यम से संदेश देना। यह बदलाव किसी संयोग का हिस्सा नहीं था, बल्कि एक रणनीतिक निर्णय था।


पाकिस्तान ने ईरान और अमेरिका के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाने की जिम्मेदारी ली है, ऐसे में दोनों पक्षों को अलग-अलग तरीके से संदेश देना आवश्यक था।