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पाकिस्तान की बमबारी से बलूचिस्तान में हड़कंप, भारत से मदद की गुहार

पाकिस्तान की वायुसेना ने बलूचिस्तान में नागरिकों पर बमबारी की, जिसमें 20 से अधिक लोगों की जान चली गई। इस हमले के बाद बलूच नेताओं ने भारत से मदद की गुहार लगाई है। बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तान के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष छेड़ दिया है। इस स्थिति में भारत का भी महत्वपूर्ण जिक्र है, जहां बलूच नेताओं ने स्वतंत्रता के लिए समर्थन मांगा है।
 

पाकिस्तानी वायुसेना की बमबारी से बलूचिस्तान में तबाही

पाकिस्तान के लड़ाकू विमानों ने अपने ही नागरिकों पर बमबारी की, जिससे 20 से अधिक निर्दोष लोगों की जान चली गई। इस बार बलूचिस्तान ने चुप्पी साधने के बजाय प्रतिरोध का रास्ता अपनाया है। बलूच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने पाकिस्तान के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष शुरू कर दिया है, जबकि बलूच नेताओं ने भारत से सहायता की मांग की है और इसके लिए आभार भी व्यक्त किया है।


11 अगस्त को बलूचिस्तान ने अपनी स्वतंत्रता का जश्न मनाया, लेकिन पाकिस्तान ने इस अवसर पर बमबारी की। बलूच मीडिया ने इस हमले की भयावह तस्वीरें साझा की हैं, जो दिल दहला देने वाली हैं। द बलूचिस्तान पोस्ट के अनुसार, पाकिस्तान की वायुसेना ने सुराब के गोंधन क्षेत्र को निशाना बनाया। स्थानीय संगठनों का कहना है कि यह हमला किसी सैन्य ठिकाने पर नहीं, बल्कि आम नागरिकों के घरों पर किया गया। इस बमबारी में कम से कम 20 नागरिकों की जान गई और कई लोग घायल हुए हैं।


यह हमला तब हुआ जब पूरे बलूचिस्तान में पाकिस्तानी सेना के खिलाफ गुस्सा अपने चरम पर था। पाकिस्तान अक्सर इन हमलों को आतंकवाद विरोधी ऑपरेशन का नाम देता है, लेकिन क्या अपने ही लोगों पर बम गिराना आतंकवाद का खात्मा है या इसे बढ़ावा देना है, यह एक बड़ा सवाल है।


पाकिस्तानी सेना ने सुराब के हमलों पर चुप्पी साधी है, लेकिन मंगलवार को उन्होंने एक बयान जारी किया। आईएसपीआर के अनुसार, उन्होंने पंजगुर जिले में एक इंटेलिजेंस आधारित ऑपरेशन चलाया, जिसमें पांच कथित आतंकवादियों को मार गिराने का दावा किया। लेकिन सवाल यह है कि अगर पंजगुर में ऑपरेशन सफल था, तो सुराब में नागरिकों पर बमबारी क्यों हुई?


बलूच मानवाधिकार कार्यकर्ताओं का कहना है कि सेना अपनी हार का बदला आम जनता से ले रही है। इस बीच, बीएलए ने पाकिस्तान को हिला कर रख दिया है। बीएलए के प्रवक्ता जियान बलूच ने हाल ही में बताया कि 1 से 8 अगस्त के बीच उन्होंने 38 बड़े ऑपरेशंस किए, जिनमें 32 पाकिस्तानी सैनिक मारे गए।


बीएलए ने न केवल सेना के काफिलों और बख्तरबंद गाड़ियों को निशाना बनाया, बल्कि रेलवे लाइनों और पुलिस चौकियों को भी उड़ा दिया। जिहान बलूच का संदेश स्पष्ट है कि जब तक पाकिस्तान बलूचिस्तान को स्वतंत्र नहीं मानता, यह संघर्ष जारी रहेगा।


इस पूरी स्थिति में भारत का भी बड़ा जिक्र है। 11 अगस्त को बलूच नेताओं ने स्पष्ट किया कि वे पाकिस्तान के कब्जे को बर्दाश्त नहीं करेंगे। बलूच नेता मीरियर बलूच ने भारत का आभार व्यक्त किया और कहा कि भारतीय मीडिया और विदेश मंत्रालय ने बलूचिस्तान के मुद्दे को वैश्विक स्तर पर उठाने में मदद की है।