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पाकिस्तान की मध्यस्थता से अमेरिका-ईरान शांति वार्ता की उम्मीदें बढ़ीं

पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे संघर्ष को समाप्त करने के लिए अपनी मध्यस्थता की कोशिशें तेज कर दी हैं। उप-प्रधानमंत्री इशाक डार ने ईरानी विदेश मंत्री से महत्वपूर्ण बातचीत की, जिसमें क्षेत्रीय शांति को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया गया। दोनों देशों के बीच 14 दिन का सीजफायर समाप्त होने वाला है, और यदि वार्ता सफल नहीं होती है, तो अमेरिका फिर से हमले की संभावना को नजरअंदाज नहीं कर सकता। आस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री ने भी पाकिस्तान की भूमिका की सराहना की।
 

पाकिस्तान की सक्रिय भूमिका


पाकिस्तान ने अमेरिका और ईरान के बीच चल रहे युद्ध को समाप्त करने के लिए अपनी मध्यस्थता की कोशिशें तेज कर दी हैं। दोनों देशों के बीच 14 दिन का सीजफायर कल समाप्त हो रहा है। यदि शांति वार्ता सफल नहीं होती है, तो अमेरिका फिर से ईरान पर हमले की संभावना को नजरअंदाज नहीं कर सकता। इस स्थिति को देखते हुए, पाकिस्तान ने निर्णायक वार्ता की आवश्यकता पर जोर दिया है ताकि पश्चिम एशिया में तनाव को कम किया जा सके।


इशाक डार की महत्वपूर्ण बातचीत

पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची के साथ सोमवार को एक महत्वपूर्ण टेलीफोन वार्ता की। इस बातचीत में डार ने क्षेत्रीय शांति और स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए सभी लंबित मुद्दों को सुलझाने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका और ईरान के बीच दूसरे दौर की बातचीत को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।


ईरान का निर्णय अभी बाकी

ईरानी मीडिया के अनुसार, दोनों नेताओं ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों और संघर्षविराम के समन्वय पर विचारों का आदान-प्रदान किया। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बकाई ने स्पष्ट किया है कि ईरान ने अमेरिका के साथ अगले दौर की वार्ता में शामिल होने पर कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है। पाकिस्तान इस समय मध्यस्थता की भूमिका निभा रहा है ताकि क्षेत्र में तनाव को कम किया जा सके।


आस्ट्रेलिया की सराहना

आस्ट्रेलियाई विदेश मंत्री पेनी वोंग ने भी इशाक डार से बातचीत की और पाकिस्तान की रचनात्मक भूमिका की सराहना की। डार ने वोंग को इस्लामाबाद में 11-12 अप्रैल को आयोजित वार्ता के बारे में जानकारी दी और शांतिपूर्ण समाधान के प्रति पाकिस्तान के संकल्प को दोहराया। दोनों नेताओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था पर संघर्षों के प्रतिकूल प्रभावों पर चिंता व्यक्त की और अंतरराष्ट्रीय सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।