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पाकिस्तान की राजनीति में मोहसिन नकवी: बिना वर्दी के मुनीर का करीबी सहयोगी

पाकिस्तान की राजनीति में सैयद मोहसिन रजा नकवी का नाम तेजी से उभरा है। बिना किसी सैन्य पृष्ठभूमि के, उन्होंने आर्मी चीफ आसिम मुनीर का विश्वास जीतकर महत्वपूर्ण पदों पर पहुंचने में सफलता पाई है। जानें उनके पत्रकारिता से गृह मंत्री बनने की यात्रा और राजनीतिक गलियारों में उनकी बढ़ती ताकत के बारे में। क्या नकवी शरीफ और जरदारी परिवार के लिए चुनौती बन सकते हैं? इस लेख में जानें उनके प्रभाव और भविष्य की संभावनाओं के बारे में।
 

सियासत में मोहसिन नकवी का उभरता नाम


नई दिल्ली: पाकिस्तान की राजनीतिक परिदृश्य में पिछले दो वर्षों में सैयद मोहसिन रजा नकवी का नाम तेजी से उभरा है। 47 वर्षीय नकवी के पास न तो कोई सैन्य पृष्ठभूमि है और न ही कोई प्रमुख राजनीतिक विरासत, फिर भी उनका प्रभाव रावलपिंडी के उच्च अधिकारियों के समान माना जाता है। इसका मुख्य कारण है आर्मी चीफ फील्ड मार्शल आसिम मुनीर का उन पर विश्वास।


पत्रकार से गृह मंत्री बनने की यात्रा

मोहसिन नकवी ने अपने करियर की शुरुआत CNN में इंटर्नशिप से की थी। 9/11 के बाद जब पाकिस्तान वैश्विक मीडिया में चर्चा में था, तब नकवी ने तेजी से प्रगति की और दक्षिण एशिया के क्षेत्रीय प्रमुख बन गए।


2009 में, केवल 31 वर्ष की आयु में, उन्होंने अपना मीडिया समूह स्थापित किया। उनके द्वारा स्थापित चैनलों में सिटी 42, सिटी 41, रोही टीवी और 24 न्यूज शामिल हैं। मीडिया के माध्यम से उन्होंने राजनीति और रक्षा क्षेत्र में गहरी पैठ बनाई।


जनवरी 2023 में उनका असली मोड़ आया जब उन्हें पंजाब का कार्यवाहक मुख्यमंत्री नियुक्त किया गया। इमरान खान के आंदोलन और चुनावी तनाव के बीच, उन्होंने प्रशासन और पुलिस के साथ सेना के साथ प्रभावी तालमेल स्थापित किया। विशेष रूप से, 9 मई 2023 की हिंसा के बाद PTI पर कार्रवाई में उनकी भूमिका को एस्टैब्लिशमेंट ने सराहा।


मुनीर का करीबी सिविलियन चेहरा

2024 के चुनावों के बाद, नकवी को पाकिस्तान का गृह मंत्री नियुक्त किया गया। इसके साथ ही, उन्हें पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड का अध्यक्ष और एशियन क्रिकेट काउंसिल का प्रेसिडेंट भी बनाया गया।


राजनीतिक हलकों में उन्हें 'बिना वर्दी वाला मुनीर' कहा जाता है। उनकी ताकत नेटवर्किंग में है - मीडिया, राजनीति और सेना के बीच संबंध स्थापित करने की उनकी क्षमता। पश्चिम एशिया के संकट और ईरान युद्ध के दौरान, उन्होंने पाकिस्तान की ओर से कई संवेदनशील वार्ताओं का संचालन किया, जो आमतौर पर विदेश मंत्रालय का कार्य होता है।


शरीफ-जरदारी की चुनौती

दिलचस्प बात यह है कि नकवी के पास नवाज-शहबाज शरीफ जैसा वोट बैंक नहीं है और न ही बिलावल भुट्टो जैसी विरासत। फिर भी, वह सत्ता के सबसे प्रभावशाली केंद्र तक पहुंच रखते हैं। यही कारण है कि उन्हें 'एस्टैब्लिशमेंट का पसंदीदा चेहरा' कहा जाता है।


सोशल मीडिया पर मुनीर और नकवी के बीच रिश्तेदारी के दावे होते हैं, लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिर भी, दोनों के बीच की नजदीकी स्पष्ट है। पंजाब में कार्यवाहक मुख्यमंत्री रहते हुए, नकवी ने जो प्रशासनिक पकड़ बनाई, उसने उन्हें मुनीर का सबसे विश्वसनीय सिविलियन सहयोगी बना दिया।


आज पाकिस्तान में आंतरिक सुरक्षा, क्रिकेट और राजनीतिक बैकचैनल - ये तीनों महत्वपूर्ण मोर्चे नकवी के पास हैं। यही शरीफ और जरदारी परिवार के लिए सबसे बड़ी चुनौती है।