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पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में बढ़ते जन-आंदोलन की कहानी

पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर में हालात बिगड़ते जा रहे हैं, जहां जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने सुरक्षा बलों की पुनः तैनाती के खिलाफ चेतावनी दी है। उमर नज़ीर कश्मीरी ने कहा है कि यदि सुरक्षा बलों को वापस लाया गया, तो इसे बाहरी आक्रमण माना जाएगा। JAAC पिछले कई महीनों से आर्थिक और राजनीतिक सुधारों की मांग कर रही है, जिसमें स्थानीय लोगों के अधिकारों की रक्षा करना शामिल है। सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया है, जबकि संगठन ने अपने आंदोलन को शांतिपूर्ण बताया है।
 

पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बिगड़ते हालात


नई दिल्ली: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। पिछले कुछ महीनों से चल रहे जन-आंदोलन के बीच, जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान सरकार को स्पष्ट चेतावनी दी है। कमेटी ने कहा है कि PoK में सुरक्षा बलों की पुनः तैनाती को सहन नहीं किया जाएगा और इसे बाहरी आक्रमण माना जाएगा।


उमर नज़ीर कश्मीरी का बयान

JAAC के नेता उमर नज़ीर कश्मीरी ने बताया कि कोटली और उसके आस-पास के क्षेत्रों से कुछ पाकिस्तानी सुरक्षा बलों के जवान पीछे हट गए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि इन जवानों को फिर से तैनात किया गया, तो स्थानीय लोग इसका कड़ा विरोध करेंगे। उमर नज़ीर ने कहा, "कोटली और अन्य क्षेत्रों से फोर्स पीछे हट गई है। अगर किसी भी प्रकार की फोर्स को यहां लाया गया, चाहे वह कहीं से भी आए, हम इसे अपने राज्य पर बाहरी हमला मानेंगे। हम इसका विरोध करेंगे।"


उन्होंने यह भी कहा कि उनका विरोध केवल एक जिले तक सीमित नहीं है। उनका मानना है कि PoK के किसी भी जिले में अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती नहीं होनी चाहिए।


आंदोलन के कारण

PoK में यह आंदोलन अचानक नहीं शुरू हुआ है। JAAC पिछले कई महीनों से आर्थिक, राजनीतिक और प्रशासनिक सुधारों की मांग कर रही है। संगठन ने कई बार बंद, रैलियां और विरोध मार्च आयोजित किए हैं। उनकी मांगों में महंगाई पर सब्सिडी, बेहतर प्रशासन और स्थानीय लोगों को अधिक राजनीतिक प्रतिनिधित्व देना शामिल है।


आंदोलनकारियों की एक प्रमुख मांग यह भी है कि आजाद जम्मू-कश्मीर विधानसभा में 12 आरक्षित सीटों को समाप्त किया जाए। ये सीटें पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में रहने वाले कश्मीरी शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं। JAAC का आरोप है कि इन सीटों के कारण स्थानीय लोगों के अधिकारों का हनन हो रहा है। जून के बाद से आंदोलन और तेज हो गया है, जिसमें मुजफ्फराबाद, रावलकोट, मीरपुर और कोटली में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन हुए हैं। कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के बीच झड़पों की भी खबरें आई हैं।


सरकार द्वारा प्रतिबंध

बढ़ते विरोध को देखते हुए, PoK सरकार ने JAAC पर प्रतिबंध लगा दिया है और कुछ नेताओं के खिलाफ मामले दर्ज किए हैं। सरकार का आरोप है कि संगठन ने कानून-व्यवस्था को बिगाड़ा है। वहीं, JAAC ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि उनका आंदोलन पूरी तरह से शांतिपूर्ण है।