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पाकिस्तान के आतंकवाद पर अमेरिकी रिपोर्ट का बड़ा खुलासा: क्या है सच?

हाल ही में जारी अमेरिकी CRS रिपोर्ट ने पाकिस्तान में सक्रिय आतंकवादी संगठनों की सच्चाई को उजागर किया है। रिपोर्ट में लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों की गतिविधियों का विस्तृत वर्णन किया गया है। यह रिपोर्ट पाकिस्तान के दोहरे चरित्र को भी दर्शाती है, जहां एक ओर वह आतंकवाद का शिकार होने का दावा करता है, वहीं दूसरी ओर वह आतंकवादी नेटवर्कों की मेज़बानी कर रहा है। जानें इस रिपोर्ट में और क्या खुलासे हुए हैं और भारत का इस पर क्या रुख है।
 

पाकिस्तान के आतंकवाद का सच


हाल ही में जारी हुई अमेरिकी कांग्रेस रिसर्च सर्विस (CRS) की रिपोर्ट ने पाकिस्तान के आतंकवाद से जुड़े दावों की सच्चाई को उजागर किया है। रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे भारत-विरोधी आतंकी संगठन पाकिस्तान में बिना किसी रुकावट के सक्रिय हैं। यह खुलासा तब हुआ है जब पाकिस्तान खुद को आतंकवाद का शिकार बताता रहा है, जबकि वास्तविकता कुछ और ही है। रिपोर्ट में जम्मू-कश्मीर और भारत को निशाना बनाने वाले कई आतंकी समूहों की गतिविधियों का विस्तार से वर्णन किया गया है।


CRS रिपोर्ट में प्रमुख आतंकी संगठनों का जिक्र

इस रिपोर्ट में 15 प्रमुख आतंकी संगठनों का उल्लेख किया गया है, जिनमें से कई को अमेरिका ने 'विदेशी आतंकवादी संगठन' के रूप में वर्गीकृत किया है। रिपोर्ट भारत और कश्मीर-केंद्रित आतंकी समूहों से उत्पन्न खतरे की ओर इशारा करती है।


रिपोर्ट में जिन प्रमुख संगठनों का उल्लेख किया गया है, उनमें शामिल हैं:


  • लश्कर-ए-तैयबा (LeT)
  • जैश-ए-मोहम्मद (JeM)
  • हरकत-उल जिहाद इस्लामी (HUJI)
  • हरकत उल-मुजाहिदीन (HuM)
  • हिज्बुल मुजाहिदीन (HM)


लश्कर-ए-तैयबा की स्थिति

1980 के दशक के अंत में स्थापित लश्कर-ए-तैयबा को 2001 में FTO घोषित किया गया था। यह संगठन पाकिस्तान के पंजाब और कब्जे वाले कश्मीर में सक्रिय है। रिपोर्ट के अनुसार, हाफिज सईद के नेतृत्व में यह गुट अपने नाम को बदलकर जमात-उद-दावा रख चुका है ताकि प्रतिबंधों से बच सके। इसके पास हजारों लड़ाके हैं और इसने 2008 के मुंबई हमलों की साजिश रची थी, जिसमें 166 लोग मारे गए थे।


जैश-ए-मोहम्मद की गतिविधियां

साल 2000 में मसूद अजहर द्वारा स्थापित जैश-ए-मोहम्मद को भी 2001 में FTO घोषित किया गया था। इसने 2001 के भारतीय संसद हमले में लश्कर का साथ दिया था। रिपोर्ट के अनुसार, जैश के पास लगभग 500 हथियारबंद आतंकी हैं जो भारत, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में सक्रिय हैं। इसका मुख्य उद्देश्य जम्मू-कश्मीर को पाकिस्तान में मिलाना है।


हिज्बुल मुजाहिदीन का खतरा

1989 में स्थापित हिज्बुल मुजाहिदीन को 2017 में अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित किया था। इसके पास लगभग 1500 कैडर हैं जो कश्मीर की आजादी या जम्मू-कश्मीर के पाकिस्तान में विलय की मांग करते हैं। यह समूह अल-कायदा जैसे वैश्विक संगठनों के साथ मिलकर काम करता है।


पाकिस्तान की विफलता और मदरसों की भूमिका

रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि पाकिस्तान आतंकवादी समूहों को समाप्त करने में असफल रहा है। कई बड़े सैन्य अभियानों के बावजूद, ये समूह अभी भी सक्रिय हैं। अमेरिकी विदेश विभाग के अनुसार, पाकिस्तान ने 2023 में आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के लिए कुछ कदम उठाए हैं, लेकिन वहां के मदरसे अभी भी हिंसक विचारधारा को बढ़ावा दे रहे हैं।


पाकिस्तान का दोहरा चरित्र

दक्षिण एशिया के विशेषज्ञ के. एलन क्रोनस्टेड द्वारा तैयार की गई यह CRS रिपोर्ट पाकिस्तान को 'पीड़ित और समर्थक' दोनों के रूप में दर्शाती है। एक ओर, इस्लामाबाद घरेलू हिंसा से जूझ रहा है, वहीं दूसरी ओर यह उन आतंकी नेटवर्कों की मेज़बानी कर रहा है जो भारत को निशाना बनाते हैं।


रिपोर्ट में आतंकी गुटों का वर्गीकरण

रिपोर्ट में पाकिस्तान में सक्रिय आतंकी और अन्य गुटों को पांच श्रेणियों में वर्गीकृत किया गया है:


  • वैश्विक स्तर पर सक्रिय
  • अफगानिस्तान-केंद्रित
  • भारत और कश्मीर-केंद्रित
  • घरेलू स्तर पर सक्रिय
  • सांप्रदायिक (शिया-विरोधी)


भारत का स्पष्ट रुख

पाकिस्तान की इन गुटों को समाप्त करने में अक्षमता के कारण भारत के साथ उसका तनाव बना हुआ है। भारत का मानना है कि स्थायी शांति के लिए सीमा पार आतंकवाद पर नियंत्रण आवश्यक है। अमेरिका के इस ताजा आकलन ने भारत के इस रुख को और मजबूत किया है।