पाकिस्तान के आर्मी चीफ आसिम मुनीर को मिली नई चुनौती: जनसंख्या नियंत्रण
नई जिम्मेदारी का सामना
नई दिल्ली: पाकिस्तान के आर्मी प्रमुख जनरल आसिम मुनीर की जिम्मेदारियों की सूची में एक नया कार्य जुड़ गया है। सेना, कूटनीति और अर्थव्यवस्था के अलावा, अब उन्हें देश की तेजी से बढ़ती जनसंख्या को नियंत्रित करने का कार्य भी सौंपा गया है। यह घोषणा इस सप्ताह सीनेट की बैठक में स्वास्थ्य मंत्री सैयद मुस्तफा कमाल ने की।
शहबाज़ सरकार की नई पहल
'द डॉन' की रिपोर्ट के अनुसार, पाकिस्तान की जनसंख्या 25.9 करोड़ से अधिक है, जिससे यह दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा देश बन गया है। अनुमान है कि 2030 तक यह इंडोनेशिया को पीछे छोड़कर चौथा सबसे बड़ा देश बन जाएगा। आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह बढ़ती जनसंख्या एक गंभीर समस्या बन गई है।
इसी कारण, प्रधानमंत्री शहबाज़ शरीफ ने एक विशेष समिति का गठन किया है, जिसमें आर्मी चीफ आसिम मुनीर भी शामिल हैं। सरकार ने इसे राष्ट्रीय प्राथमिकता के रूप में मान्यता दी है। स्वास्थ्य मंत्री ने कहा, "सरकार इस मुद्दे को उच्चतम प्राथमिकता दे रही है और सभी स्तरों पर महत्वपूर्ण नीतिगत निर्णय लिए जा रहे हैं।"
आसिम मुनीर पर बढ़ता बोझ
जनरल मुनीर पहले से ही कई मोर्चों पर कार्यरत हैं। बलूचिस्तान और अफगान सीमा पर सुरक्षा चुनौतियों के साथ-साथ POK में बढ़ती अशांति और आर्थिक समस्याएं भी उनके सामने हैं। हाल ही में बलूचिस्तान में विद्रोहियों और TTP ने 42 सुरक्षाकर्मियों की जान ले ली थी। ऐसे में जनसंख्या नियंत्रण जैसी सिविल जिम्मेदारी को सेना प्रमुख को सौंपना पाकिस्तान में चर्चा का विषय बन गया है।
सोशल मीडिया पर इस पर कई मीम्स भी वायरल हो गए हैं। एक यूजर ने मजाक में लिखा, "क्या मुनीर साहब अब कंडोम बांटेंगे?" पत्रकार असद तूर ने तंज करते हुए कहा, "अगर जनसंख्या नियंत्रण के लिए फील्ड मार्शल की जरूरत है, तो सरकार को घर लौट जाना चाहिए।"
जनसंख्या वृद्धि के कारण
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जनसंख्या वृद्धि की दो मुख्य वजहें हैं। पहली, गर्भनिरोधक साधनों की कमी। पाकिस्तान में हर साल औसतन 67 लाख बच्चे पैदा होते हैं। इसे नियंत्रित करने के लिए सरकार गर्भनिरोधक उत्पादों पर टैक्स में छूट देने पर विचार कर रही है। दूसरी वजह है राजस्व का बंटवारा। वर्तमान में, प्रांतों को मिलने वाले फंड का लगभग 80% जनसंख्या के आधार पर निर्धारित होता है।
इसका अर्थ है कि अधिक जनसंख्या = अधिक धन। सरकार अब इसे 50% से नीचे लाने की योजना बना रही है, लेकिन इससे सबसे अधिक समस्या पंजाब को होगी, जो सबसे बड़ा प्रांत है और शरीफ परिवार का गढ़ भी है। वहां के नेता शायद राजस्व कटौती पर सहमत नहीं होंगे।
क्या मुनीर इस चुनौती को पार कर पाएंगे?
वर्तमान में, पाकिस्तान की जनसंख्या बढ़ने की दर 2.55% प्रति वर्ष है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि यह गति बनी रही, तो देश के संसाधन जल्द ही समाप्त हो जाएंगे। कर्ज और विदेशी सहायता पर निर्भर अर्थव्यवस्था के लिए यह एक गंभीर चेतावनी है। अब देखना होगा कि "हर मोर्चे के जनरल" आसिम मुनीर इस नए मोर्चे पर भी सफलता प्राप्त कर पाते हैं या नहीं।