पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हिंसा: 27 प्रदर्शनकारियों की मौत, तनाव बढ़ा
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हालात बिगड़े
नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थिति एक बार फिर गंभीर हो गई है। गिलगित बाल्टिस्तान में 7 जून को हुए चुनावों के दौरान रावलकोट में सुरक्षाबलों की गोलीबारी में 27 प्रदर्शनकारियों की जान चली गई।
गोलीबारी के पीछे का कारण
जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तानी सेना और रेंजर्स ने अंतिम संस्कार में शामिल लोगों पर सीधे फायरिंग की। इस घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बढ़ गया है और लोग सड़कों पर उतर आए हैं।
जनाजे के दौरान हुई गोलीबारी
JAAC के अनुसार, शुक्रवार को प्रदर्शनकारी शाहजेब हबीब को पाकिस्तानी रेंजर्स ने गोली मार दी थी। शनिवार को उनके जनाजे की नमाज के लिए रावलकोट के कंबाइंड मिलिट्री हॉस्पिटल के बाहर बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए। इसमें अवामी एक्शन कमेटी के नेता और स्थानीय लोग शामिल थे।
लोग अस्पताल के बाहर पाकिस्तानी सेना और सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर रहे थे, तभी सुरक्षाबलों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी। CNN-न्यूज18 की रिपोर्ट के अनुसार, इस गोलीबारी में कम से कम 27 लोगों की मौत हुई। कुछ स्थानीय लोगों का कहना है कि मृतकों की संख्या 100 से अधिक हो सकती है, लेकिन इसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।
हिरासत में लिए गए लोग और लापता
JAAC ने बताया कि गोलीबारी के बाद अस्पताल परिसर से 100 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है। कई लोग अब भी लापता हैं। कमेटी का आरोप है कि सुरक्षाबलों ने मारे गए प्रदर्शनकारियों के शवों को भी अपने कब्जे में ले लिया है, जिससे परिजनों को अंतिम संस्कार करने में कठिनाई हो रही है।
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में पिछले कुछ हफ्तों से लोग राजनीतिक उत्पीड़न और सुरक्षाबलों की मनमानी के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस क्षेत्र को एक खुली जेल में बदल दिया गया है और किसी भी प्रकार के विरोध को सहन नहीं किया जाता।
प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच झड़पें
हाल के प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के बीच कई बार झड़पें हुई हैं। एक्टिविस्टों के अनुसार, इन झड़पों में पाकिस्तान से जुड़े सुरक्षाबलों के 7 सदस्य भी मारे गए हैं, जिनमें PoK पुलिस के 4 जवान और रेंजर्स व फ्रंटियर कॉर्प्स के 3 सदस्य शामिल हैं।
JAAC का कहना है कि चुनाव के नाम पर लोगों की आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से हस्तक्षेप की अपील की है। वहीं, PoK प्रशासन ने अभी तक मौतों की आधिकारिक संख्या जारी नहीं की है। गोलीबारी की इस घटना ने एक बार फिर PoK में पाकिस्तान की नीतियों और सुरक्षाबलों के व्यवहार पर सवाल उठाए हैं।