पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में हिंसा: भारत ने चुनावों को बताया दिखावा
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में बढ़ती हिंसा और हालिया चुनावों पर भारत ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। विदेश मंत्रालय ने इसे पाकिस्तान की एक सुनियोजित चाल करार दिया है।
MEA का बयान: "ये चुनाव महज दिखावा हैं"
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने एक नियमित ब्रीफिंग में कहा कि PoK में हुए चुनाव केवल एक दिखावा हैं। उनके अनुसार, "पाकिस्तान इस चुनावी नाटक के माध्यम से अपने अवैध कब्जे को छिपाने की कोशिश कर रहा है और मानवाधिकारों के उल्लंघन पर पर्दा डालना चाहता है।"
जायसवाल ने स्पष्ट किया कि भारत का रुख पहले जैसा ही है। उन्होंने कहा, "जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र, जिसमें वे इलाके भी शामिल हैं जो पाकिस्तान के अवैध कब्जे में हैं, भारत का अभिन्न हिस्सा है।"
PoK में बढ़ते विरोध प्रदर्शन
इस बीच, PoK में विरोध प्रदर्शन तेज हो गए हैं। सोमवार को रावलकोट में पुलिस की फायरिंग में कम से कम 19 लोगों की मौत हो गई, जबकि कई अन्य घायल हुए हैं।
यह जानकारी 'अवामी हुकूक लॉन्ग मार्च' में शामिल लोगों ने दी। जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी के नेता इम्तियाज़ असलम ने एक वीडियो जारी किया, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने चिनार चौक से D-चौक की ओर बढ़ते हुए रात में मकबूल भट्ट शहीद चौक पर रुकने की बात कही।
असलम ने कहा, "पाकिस्तान की फोर्स ने हमारे बेगुनाह युवाओं पर गोलियां चलाईं, जिसमें 14 युवा शहीद हो गए। शहीदों में आंदोलन के संस्थापक उमर नज़ीर कश्मीरी के छोटे भाई उस्मान नज़ीर भी शामिल हैं।"
विरोध की जड़ें: महंगाई और अधिकारों का हनन
MEA ने कहा कि PoK में हो रहे बड़े पैमाने पर विरोध का कारण आर्थिक शोषण और बुनियादी अधिकारों से वंचित होना है। जायसवाल ने कहा, "वहां के लोग महंगाई, खराब प्रशासन और अपने अधिकारों के लिए सड़कों पर हैं। पाकिस्तान इस सच्चाई को चुनाव के नाम पर छिपाने की कोशिश कर रहा है।"
भारत का स्पष्ट स्टैंड
भारत ने दोहराया है कि PoK में होने वाली किसी भी राजनीतिक गतिविधि को वह मान्यता नहीं देता। सरकार का कहना है कि वहां की स्थिति पाकिस्तान की नीतियों के कारण बिगड़ी है। रावलकोट की घटना के बाद पूरे क्षेत्र में तनाव बना हुआ है, इंटरनेट सेवाएं बाधित हैं और सुरक्षा बढ़ा दी गई है।