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पाकिस्तान के पीएम शहबाज शरीफ पर भारतीय पत्रकारों का तीखा सवाल, आतंकवाद पर चुप्पी साधी

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने न्यूयॉर्क में भारतीय पत्रकारों के तीखे सवालों का सामना किया, लेकिन आतंकवाद के मुद्दे पर चुप्पी साधे रखी। पत्रकारों ने उनसे हाफिज सईद और आतंकवाद को लेकर सवाल किए, लेकिन उन्होंने कोई जवाब नहीं दिया। भारत ने संयुक्त राष्ट्र में पाकिस्तान की आलोचना करते हुए कहा कि उसे अपनी बिगड़ती अर्थव्यवस्था पर ध्यान देना चाहिए। इस घटना ने यह स्पष्ट कर दिया कि पाकिस्तान आतंकवाद के खिलाफ अपनी बातों में कितनी गंभीरता रखता है।
 

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री की न्यूयॉर्क यात्रा


नई दिल्ली: न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का सामना भारतीय पत्रकारों से हुआ, जिन्होंने आतंकवाद के मुद्दे पर तीखे सवाल पूछे। जब वह अंदर जा रहे थे, एक पत्रकार ने सीधा सवाल किया, 'आप आतंकियों को पनाह देना कब बंद करेंगे?' इस पर शहबाज शरीफ ने बिना जवाब दिए हाथ हिलाते हुए आगे बढ़ गए। बाहर निकलते समय फिर से सवाल किया गया, 'लश्कर-ए-तैयबा के नेता हाफिज सईद पर कब कार्रवाई करेंगे?' इस बार भी उन्होंने चुप्पी साधे रखी और वहां से चले गए।


हाफिज सईद का आतंकवाद से संबंध

हाफिज मोहम्मद सईद लश्कर-ए-तैयबा का संस्थापक है और भारत ने उसे यूएपीए के तहत आतंकवादी घोषित किया है। वह 26/11 के मुंबई हमले का मुख्य आरोपी है और कई अन्य हमलों का मास्टरमाइंड माना जाता है। पाकिस्तान में वह स्वतंत्र रूप से घूमता है, और आरोप है कि आईएसआई उसे सुरक्षा प्रदान करती है। हाल ही में, एनआईए ने पहलगाम आतंकी हमले की जांच में उसे आरोपी नंबर 8 बनाया है, जिसमें कहा गया है कि इस हमले की साजिश में पाकिस्तान स्थित लश्कर के लोग शामिल थे।


भारत का पाकिस्तान पर सीधा हमला

ये सवाल तब उठे जब भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में पाकिस्तान की आलोचना की। भारतीय राजनयिक क्षितिज त्यागी ने स्पष्ट रूप से कहा कि पाकिस्तान को दूसरे देशों की जमीन पर नजर रखने और सीमा पार आतंकवाद फैलाने के बजाय अपनी बिगड़ती अर्थव्यवस्था और विकास पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए। उन्होंने पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर में नागरिकों की हत्या और आवश्यक वस्तुओं की कमी जैसे मुद्दों को भी उठाया। भारत का संदेश स्पष्ट था कि दूसरों पर उंगली उठाने से पहले अपने देश की स्थिति को सुधारें। शहबाज शरीफ का चुप रहकर भागना यह दर्शाता है कि पाकिस्तान आतंकवाद के मुद्दे पर अब भी बचाव की मुद्रा में है। हाफिज सईद जैसे आतंकियों को सजा दिलाने के सवाल पर वह जवाब देने से बचते नजर आए। दुनिया देख रही है कि आतंकवाद के खिलाफ पाकिस्तान की बातें कितनी खोखली हैं।