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पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के बयान से PoK में मचा हंगामा, फैसल राठौर ने दी कड़ी प्रतिक्रिया

पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के हालिया बयान ने पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में हंगामा मचा दिया है। इस विवाद में PoK के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर ने आसिफ को सार्वजनिक रूप से फटकार लगाई और माफी मांगने की मांग की। राठौर ने कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए किसी की मंजूरी की आवश्यकता नहीं है। इस घटनाक्रम ने पाकिस्तान और PoK के बीच बढ़ते तनाव को उजागर किया है। जानें इस विवाद के सभी पहलुओं के बारे में।
 

पाकिस्तान और PoK के बीच बढ़ता तनाव


नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और इस्लामाबाद के बीच हालिया तनाव अब खुलकर सामने आ गया है। रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ के एक विवादास्पद बयान ने PoK के प्रधानमंत्री फैसल मुमताज राठौर को सार्वजनिक रूप से उनकी आलोचना करने पर मजबूर कर दिया। राठौर ने आसिफ से माफी मांगने की मांग की, जिससे पाकिस्तान सरकार और PoK प्रशासन के बीच की दरार और भी स्पष्ट हो गई है।


ख्वाजा आसिफ के बयान से उत्पन्न विवाद

यह विवाद तब शुरू हुआ जब ख्वाजा आसिफ ने एक टीवी साक्षात्कार में कहा कि 'रावलाकोट और मीरपुर के लोग असली कश्मीरी नहीं हैं।' इस बयान के बाद PoK में व्यापक आक्रोश फैल गया। प्रधानमंत्री राठौर ने X पर आसिफ को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान साबित करने के लिए किसी की अनुमति की आवश्यकता नहीं है।


उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे बयानों से समाज में विभाजन पैदा होता है। राठौर ने स्पष्ट किया कि जम्मू-कश्मीर के लोगों को अपनी पहचान के लिए पाकिस्तान के रक्षा मंत्री के प्रमाणपत्र की आवश्यकता नहीं है।


PoK सरकार को बलि का बकरा बनाने का आरोप

राठौर ने यह भी आरोप लगाया कि ख्वाजा आसिफ अपने बयान के बाद PoK सरकार पर हमला करके अपनी गलती से ध्यान भटका रहे हैं। उन्होंने कहा कि यदि रक्षा मंत्री को PoK सरकार के कामकाज पर संदेह है, तो उन्हें अपनी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व से पूछना चाहिए। राठौर ने दो टूक कहा कि आसिफ को अपने बयान के लिए सार्वजनिक माफी मांगनी चाहिए, न कि PoK सरकार को दोषी ठहराना चाहिए।


बिलावल भुट्टो की नाराजगी

यह विवाद केवल PoK तक सीमित नहीं रहा। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के अध्यक्ष बिलावल भुट्टो जरदारी ने भी संसद में ख्वाजा आसिफ के बयान पर आपत्ति जताई। उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ से आग्रह किया कि वे अपने मंत्रियों को जिम्मेदार बनाएं। बिलावल ने कहा कि कश्मीर जैसे संवेदनशील मुद्दों पर गैर-जिम्मेदाराना बयानबाजी नहीं होनी चाहिए।


उन्होंने जोर देकर कहा कि PoK से जुड़े राजनीतिक मुद्दों का समाधान बातचीत के माध्यम से होना चाहिए, न कि प्रशासनिक दबाव से। इस घटनाक्रम ने यह स्पष्ट कर दिया है कि पाकिस्तान और PoK के बीच संबंधों में कितनी कड़वाहट आ चुकी है। एक बयान ने दोनों के बीच की खींचतान को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उजागर कर दिया है।