पाकिस्तान के सीनेटर की सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए सेना भेजने की मांग
सऊदी अरब पर बढ़ते हूती हमले
नई दिल्ली: सऊदी अरब पर हूती हमलों के चलते पाकिस्तान में राजनीतिक और धार्मिक गतिविधियाँ तेज हो गई हैं। पाकिस्तान के सीनेटर अब्दुल करीम ने सरकार से अनुरोध किया है कि वह सऊदी अरब की सुरक्षा के लिए पाकिस्तानी सेना को भेजे। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार ऐसा नहीं करती, तो अहले-हदीस के 1 लाख युवाओं को मक्का और मदीना की रक्षा के लिए जाने की अनुमति दी जानी चाहिए।
सऊदी अरब का इस्लामिक महत्व
एक सभा में बोलते हुए, सीनेटर अब्दुल करीम ने सऊदी अरब को इस्लाम के दृष्टिकोण से अत्यंत महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा कि वहां कुरान और सुन्नत के अनुसार शासन चलता है और तौहीद को बनाए रखा जाता है। उनके अनुसार, सऊदी अरब लगातार हमलों का सामना कर रहा है, इसलिए पाकिस्तान को उसकी सुरक्षा में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने सरकार से अपील की कि सऊदी अरब की रक्षा के लिए सैनिक भेजे जाएं। उन्होंने यह भी कहा कि मक्का और मदीना के पवित्र स्थलों की सुरक्षा के लिए लोग तैयार हैं।
1 लाख युवाओं की सुरक्षा के लिए जाने की इच्छा
अब्दुल करीम ने सरकार को चेतावनी दी कि यदि पाकिस्तान सेना भेजने में असमर्थ रहता है, तो अहले-हदीस के लोगों को वहां जाने की अनुमति दी जानी चाहिए। उनका दावा है कि लगभग 1 लाख युवा मक्का और मदीना की सुरक्षा के लिए जाने को इच्छुक हैं।
हूती हमलों का बढ़ता खतरा
सीनेटर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब यमन के ईरान समर्थित हूती समूह और सऊदी अरब के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है। 13 सितंबर को, हूतियों ने दक्षिणी सऊदी अरब के शरूराह क्षेत्र में एक सैन्य ठिकाने पर बैलिस्टिक और क्रूज मिसाइलों से हमले का दावा किया।
हूतियों के अनुसार, इस हमले में एक कमांड सेंटर और हथियारों के भंडार को निशाना बनाया गया। दक्षिणी शहर जजान में भी हमलों के कारण एक मस्जिद और कई घरों को नुकसान पहुंचा है, जिसमें कम से कम दो नागरिक घायल हुए हैं। इससे पहले भी ड्रोन और मिसाइल हमलों में 73 नागरिकों के घायल होने की सूचना मिली थी।
तेल पाइपलाइन पर खतरा
हूती ड्रोन हमलों के बाद, सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट तेल पाइपलाइन के संचालन पर भी असर पड़ने की खबरें आई हैं। विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि पाइपलाइन जल्द शुरू नहीं हुई, तो रेड सी बंदरगाह पर उपलब्ध निर्यात योग्य कच्चे तेल का भंडार पांच से सात दिनों में समाप्त हो सकता है। इस संदर्भ में, पाकिस्तानी सीनेटर का बयान क्षेत्रीय तनाव पर नई चर्चाएँ उत्पन्न कर रहा है।