×

पाकिस्तान के सेना प्रमुख का कश्मीर पर विवादास्पद बयान: क्या है असली मकसद?

पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने कश्मीर को पाकिस्तान की 'जुगुलर वेन' बताया है, जबकि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में विरोध प्रदर्शन बढ़ रहे हैं। जानिए इस बयान का असली मकसद क्या है और कैसे यह स्थानीय असंतोष से ध्यान हटाने का प्रयास हो सकता है।
 

पाकिस्तान के सेना प्रमुख का नया बयान


नई दिल्ली: पाकिस्तान के सेना प्रमुख, फील्ड मार्शल आसिम मुनीर, ने हाल ही में कश्मीर को लेकर एक बार फिर भारत के खिलाफ बयान दिया है। उन्होंने इसे पाकिस्तान की 'जुगुलर वेन' यानी सबसे महत्वपूर्ण नस करार दिया। यह बयान ऐसे समय में आया है जब पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थानीय लोगों द्वारा सरकार के खिलाफ विरोध प्रदर्शन तेज हो रहे हैं।


कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस में कश्मीर का जिक्र

रावलपिंडी में स्थित सेना मुख्यालय (GHQ) में आयोजित 276वीं कोर कमांडर्स कॉन्फ्रेंस की अध्यक्षता आसिम मुनीर ने की। इस बैठक के बाद पाकिस्तानी सेना की मीडिया शाखा आईएसपीआर ने एक बयान जारी किया, जिसमें जम्मू-कश्मीर में मानवाधिकार उल्लंघन और जनसंख्या संतुलन में बदलाव के आरोप भारत पर लगाए गए। इसके साथ ही, कश्मीर को पाकिस्तान के लिए एक महत्वपूर्ण मुद्दा बताया गया।


PoK में विरोध प्रदर्शन की बढ़ती लहर

दूसरी ओर, पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) ने पाकिस्तान और स्थानीय प्रशासन को 8 जुलाई तक अपनी मांगें पूरी करने का अल्टीमेटम दिया है। संगठन ने चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगें समय पर नहीं मानी गईं, तो वे बड़े पैमाने पर आंदोलन की घोषणा करेंगे। समर्थकों से शांतिपूर्ण और संगठित तरीके से विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की गई है।


सुरक्षा और आतंकवाद पर चर्चा

बैठक में पाकिस्तान की आंतरिक सुरक्षा और सैन्य तैयारियों की समीक्षा भी की गई। आईएसपीआर ने दावा किया कि पाकिस्तान के खिलाफ सक्रिय आतंकी समूह सीमावर्ती क्षेत्रों से संचालित हो रहे हैं। सेना ने आतंकवाद विरोधी अभियानों को जारी रखने की बात कही और भारत पर हाइब्रिड युद्ध और भ्रामक जानकारी फैलाने के आरोप लगाए। इसके साथ ही, सिंधु जल संधि पर अपने पुराने रुख को भी दोहराया गया।


बयान पर उठ रहे सवाल

PoK में बढ़ते विरोध प्रदर्शनों और स्थानीय लोगों की नाराजगी से ध्यान हटाने के लिए पाकिस्तान ने एक बार फिर कश्मीर का मुद्दा उठाया है। विशेषज्ञों का मानना है कि आर्थिक संकट और स्थानीय असंतोष के बीच ऐसे बयान घरेलू दबाव को कम करने के प्रयास के रूप में देखे जा रहे हैं।