पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब का नया रक्षा समझौता: अमेरिका की भूमिका पर प्रभाव
पश्चिम एशिया में सुरक्षा चिंताओं के बीच नया समझौता
पाकिस्तान, तुर्किये और सऊदी अरब के बीच हाल ही में संपन्न त्रिपक्षीय रक्षा समझौते से अमेरिका की रणनीतिक स्थिति पश्चिम एशिया में कमजोर हो सकती है। यह जानकारी पाकिस्तान के रक्षा विशेषज्ञों द्वारा दी गई है। इन तीनों देशों ने शुक्रवार को एक संयुक्त रक्षा समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसमें किसी एक देश पर हमले को सभी पर हमला माना जाएगा।
अमेरिका की सुरक्षा क्षमताओं पर सवाल
पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई के पूर्व प्रमुख के बेटे अब्दुल्ला हमीद गुल ने बताया कि यह समझौता उस समय हुआ है जब खाड़ी क्षेत्र में अमेरिका के सहयोगी देशों को सुरक्षा प्रदान करने की उसकी क्षमता पर संदेह बढ़ रहा है। गुल ने कहा, "खाड़ी देशों में अमेरिका के 27 सैन्य अड्डे थे, जिनमें से 17 को अमेरिका-ईरान युद्ध के दौरान नष्ट कर दिया गया। इससे यह सवाल उठने लगा है कि क्या अमेरिका वास्तव में उनकी रक्षा कर सकता है।"
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की नई पहचान
गुल ने यह भी कहा कि इस समझौते के बाद क्षेत्र में अमेरिका की भूमिका काफी कम हो जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि कतर और कुवैत भी जल्द ही पाकिस्तान के साथ इसी तरह के समझौतों में शामिल हो सकते हैं। विशेषज्ञ मोहम्मद मेहदी ने कहा कि इस समझौते ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पाकिस्तान की स्थिति को लेकर धारणा में बदलाव किया है। अब दुनिया पाकिस्तान को पश्चिम एशिया और मध्य एशिया में एक महत्वपूर्ण देश के रूप में देख रही है।
भविष्य में संघर्ष के खिलाफ निवारक उपाय
सेवानिवृत्त ब्रिगेडियर फारूक हमीद ने बताया कि इस समझौते में यह प्रावधान है कि किसी एक सदस्य देश पर हमला तीनों देशों पर हमला माना जाएगा। इस प्रकार, यह प्रावधान पाकिस्तान और भारत के बीच भविष्य में किसी भी संघर्ष के खिलाफ एक निवारक के रूप में कार्य करेगा।