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पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब का रक्षा सहयोग: क्या है नई रणनीति?

पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने हाल ही में अपने रक्षा सहयोग को मजबूत करने का निर्णय लिया है, खासकर सऊदी अरब में बढ़ते तनाव के बीच। रियाद में हुई एक आपात बैठक में, तीनों देशों ने सामूहिक रक्षा की दिशा में कदम उठाने पर सहमति जताई। हालांकि, बैठक में सैनिकों की संख्या और तैनाती की अवधि के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के परिणाम और इन देशों की सामूहिक सुरक्षा रणनीति के बारे में।
 

सऊदी अरब और हूती विद्रोहियों के बीच तनाव


नई दिल्ली: सऊदी अरब और यमन के हूती विद्रोहियों के बीच बढ़ते तनाव के चलते पाकिस्तान, तुर्की और सऊदी अरब ने अपने रक्षा सहयोग को मजबूत करने का निर्णय लिया है। रियाद में सोमवार को आयोजित एक आपात बैठक में, इन तीनों देशों ने सहमति जताई कि आवश्यकता पड़ने पर सैन्य बल और आवश्यक संसाधनों को सऊदी अरब में तेजी से तैनात किया जाएगा। यह निर्णय अगस्त में हुए त्रिपक्षीय रक्षा समझौते के तहत लिया गया, जिसमें यह तय किया गया था कि यदि किसी एक देश पर हमला होता है, तो यह बाकी दोनों देशों के खिलाफ भी हमला माना जाएगा। सोमवार को रियाद में Strategic Political and Defence Committee (SPDC) की बैठक में इसी सामूहिक रक्षा व्यवस्था को लागू करने पर चर्चा की गई।


सामूहिक रक्षा की दिशा में कदम

बैठक के बाद जारी संयुक्त बयान में कहा गया कि तीनों देश सामूहिक रक्षा से संबंधित प्रतिबद्धताओं को लागू करने के लिए तत्पर हैं। इसके साथ ही, तय सैन्य बल और संसाधनों को उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाएंगे, ताकि जरूरत पड़ने पर उन्हें सऊदी अरब में शीघ्र भेजा जा सके।


सैनिकों की तैनाती की जानकारी

हालांकि, बैठक के बाद जारी बयान में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि पाकिस्तान और तुर्की कितने सैनिक सऊदी अरब भेजेंगे। इसके अलावा, उनकी तैनाती की अवधि के बारे में भी कोई निश्चित समयसीमा नहीं दी गई है। बयान में हूतियों का नाम सीधे तौर पर नहीं लिया गया, लेकिन यह निर्णय सऊदी अरब पर बढ़ते हमलों की खबरों के बीच आया है।


पाकिस्तान की भूमिका

बैठक में पाकिस्तान की ओर से उपप्रधानमंत्री इशाक डार, रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ और सेना प्रमुख फील्ड मार्शल असीम मुनीर शामिल हुए। ख्वाजा आसिफ ने बताया कि पाकिस्तान और तुर्की की सेनाएं वर्तमान में सहयोगी भूमिका में हैं, जबकि सऊदी सेना सक्रिय रूप से सैन्य अभियानों में भाग ले रही है।


उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान सऊदी अरब को खुफिया और निगरानी संबंधी सहायता प्रदान कर रहा है। हालांकि, सैनिकों की संख्या या किसी बड़े सैन्य अभियान में पाकिस्तान की सीधी भागीदारी के बारे में कोई विस्तृत जानकारी नहीं दी गई है।


हमलों की निंदा

तीनों देशों ने सऊदी अरब में शहरों, नागरिक ठिकानों और आर्थिक प्रतिष्ठानों पर हो रहे हमलों की निंदा की। पवित्र शहर मक्का और मदीना को निशाना बनाने की कोशिशों पर भी चिंता व्यक्त की गई। पाकिस्तान और तुर्की ने सऊदी सुरक्षा बलों की तैयारियों और देश की सुरक्षा में उनकी भूमिका की सराहना की।