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पाकिस्तान ने ऑपरेशन सिंदूर में चीन की मध्यस्थता का समर्थन किया

पाकिस्तान ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान चीन की मध्यस्थता का समर्थन किया है, जो भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव को कम करने में मददगार साबित हुआ। यह पहली बार है जब पाकिस्तान ने इस मामले में चीन की भूमिका को स्वीकार किया है, जबकि भारत ने इस दावे को खारिज किया है। जानिए इस कूटनीतिक घटनाक्रम के पीछे की सच्चाई और इसके संभावित प्रभाव।
 

पाकिस्तान का नया दावा


नई दिल्ली: पाकिस्तान ने हाल ही में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत और पाकिस्तान के बीच हुए सैन्य तनाव में चीन की मध्यस्थता के दावे को मान्यता दी है। यह पहली बार है जब पाकिस्तान ने आधिकारिक रूप से कहा है कि चीन ने इस मामले में मध्यस्थता की थी, जो मई 2025 में चार दिनों तक चला था।


पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय का बयान

पाकिस्तान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने एक प्रेस ब्रीफिंग में बताया कि उस समय चीनी नेतृत्व लगातार पाकिस्तान के उच्च अधिकारियों के संपर्क में था। उन्होंने यह भी कहा कि चीन ने 6 से 10 मई के बीच भारतीय नेतृत्व से भी बातचीत की थी। अंद्राबी ने कहा कि इन बातचीतों ने क्षेत्र में तनाव को कम करने और शांति स्थापित करने में मदद की।


पाकिस्तान का चीन के प्रति समर्थन

अंद्राबी ने यह भी कहा कि इसी कारण से चीन द्वारा मध्यस्थता का दावा सही है। पाकिस्तान ने इसे शांति, सुरक्षा और समृद्धि के लिए की गई कूटनीति बताया है। उन्होंने चीन के विदेश मंत्री के बयान का समर्थन किया है।


हालांकि, यह बयान चौंकाने वाला है क्योंकि पाकिस्तान पहले अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को संघर्ष विराम का श्रेय देता रहा है। इससे पहले पाकिस्तान ने चीन की भूमिका का उल्लेख नहीं किया था, और अब अचानक यह दावा कूटनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गया है।


भारत की प्रतिक्रिया

भारत ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सैन्य कार्रवाई रोकने का निर्णय किसी तीसरे देश की मध्यस्थता से नहीं हुआ था। भारत का कहना है कि यह निर्णय पाकिस्तान के डीजीएमओ द्वारा भारतीय डीजीएमओ को भेजे गए अनुरोध के बाद लिया गया था। भारत ने चीन के विदेश मंत्री वांग यी के उस दावे को भी खारिज कर दिया था जिसमें कहा गया था कि बीजिंग ने संकट के दौरान मध्यस्थता की थी।


चीन का यह दावा अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों से मेल खाता है, जिनमें उन्होंने कहा था कि वॉशिंगटन ने भारत और पाकिस्तान के बीच टकराव समाप्त करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विभिन्न देशों द्वारा किए जा रहे ऐसे दावे यह दर्शाते हैं कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद कूटनीतिक स्तर पर श्रेय को लेकर खींचतान जारी है।