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पाकिस्तान में अमेरिका-ईरान वार्ता का विफल होना: इजराइल पर गंभीर आरोप

पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही वार्ता अचानक विफल हो गई, जिससे वैश्विक समुदाय में हलचल मच गई। ईरान के विदेश मंत्री ने इजराइल के प्रधानमंत्री द्वारा अमेरिकी उपराष्ट्रपति को फोन करने के आरोप लगाए हैं, जिससे वार्ता का रुख बदल गया। इस विफलता के बाद अमेरिकी सेना ने ईरानी बंदरगाहों की नाकेबंदी की घोषणा की है, जिससे तेल की कीमतों में तेजी आई है। जानें इस घटनाक्रम के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
 

अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता का अचानक विफल होना

रविवार को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के बीच चल रही महत्वपूर्ण वार्ता के अचानक विफल होने ने वैश्विक समुदाय को चौंका दिया है। इस बातचीत से मध्य-पूर्व में शांति की उम्मीदें जगी थीं, लेकिन अब इसके असफल होने के पीछे इजराइल के हस्तक्षेप के गंभीर आरोप लगाए जा रहे हैं। विशेषज्ञों ने इस स्थिति पर सवाल उठाया है कि आखिरकार अंतिम क्षणों में ऐसा क्या हुआ कि दोनों देश, जो सुलह के करीब थे, अचानक आमने-सामने आ गए?


ईरान के विदेश मंत्री का सनसनीखेज दावा

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने एक चौंकाने वाला बयान दिया है। उनके अनुसार, बातचीत के दौरान इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने अमेरिकी उपराष्ट्रपति JD वेंस को फोन किया।


अराघची ने आरोप लगाया कि इस फोन कॉल ने अमेरिका का ध्यान शांति वार्ता से हटा कर इजराइल के हितों की ओर मोड़ दिया।


ईरान का मानना है कि अमेरिका ने बातचीत के दौरान ऐसी शर्तें थोपनी शुरू कर दीं, जो वह युद्ध के मैदान में हासिल नहीं कर सका था।


"जब हम 'इस्लामाबाद MoU' के बेहद करीब थे, तभी हमें अत्यधिक मांगों और बदलते लक्ष्यों का सामना करना पड़ा। हमने सद्भावना दिखाई, लेकिन बदले में हमें दुश्मनी मिली।" — सैयद अब्बास अराघची (X पर पोस्ट)


वार्ता के विफल होने के कारण

जैसे ही बातचीत असफल हुई, विश्लेषक इस पर विचार करने लगे कि इसके पीछे क्या कारण हो सकते हैं। उनका ध्यान ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर केंद्रित हो गया; वेंस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था कि अमेरिका को यह सुनिश्चित करना है कि तेहरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश नहीं करेगा। हालांकि, ईरान का कहना है कि बातचीत अच्छी चल रही थी, लेकिन नेतन्याहू के फोन कॉल ने इसे पटरी से उतार दिया।


इजराइल पर आरोप और बातचीत की स्थिति

ईरान के विदेश मंत्री ने कहा, "बैठक के दौरान नेतन्याहू के वेंस को किए गए फोन कॉल ने बातचीत का रुख अमेरिका-ईरान वार्ता से हटाकर इजरायल के हितों की ओर मोड़ दिया। अमेरिका ने बातचीत की मेज पर वह हासिल करने की कोशिश की, जो वह युद्ध के जरिए हासिल नहीं कर सका था।"


ईरानी विदेश मंत्री ने कहा कि तेहरान ने 47 वर्षों में पहली बार "सद्भावना" के साथ अमेरिका के साथ बातचीत की, जिसका उद्देश्य युद्ध को समाप्त करना था; लेकिन अब उसे "अत्यधिक मांगें, बदलते लक्ष्य और नाकेबंदी" का सामना करना पड़ रहा है। "47 सालों में सबसे ऊंचे स्तर पर हुई गहन बातचीत में, ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ पूरी ईमानदारी से बातचीत की। लेकिन जब हम 'इस्लामाबाद MoU' से बस कुछ ही इंच दूर थे, तो हमें हद से ज़्यादा मांगें, बदलते लक्ष्य और रुकावटों का सामना करना पड़ा। कोई सबक नहीं सीखा गया। सद्भावना से सद्भावना मिलती है। दुश्मनी से दुश्मनी मिलती है," उन्होंने X पर कहा।


नौसैनिक नाकेबंदी और तेल की कीमतों में वृद्धि

बातचीत के विफल होने के बाद, अमेरिकी सेना ने घोषणा की है कि वह सोमवार से ईरानी बंदरगाहों की नौसैनिक नाकेबंदी शुरू करेगी। इस कदम का बाजार पर तुरंत प्रभाव पड़ा, और शुरुआती ट्रेडिंग में तेल की कीमतें 8 प्रतिशत बढ़कर 104.24 USD प्रति बैरल हो गईं। इसी तरह, अंतरराष्ट्रीय मानक ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 7 प्रतिशत बढ़कर 102.29 USD हो गई।


फरवरी में मध्य पूर्व में संघर्ष शुरू होने के बाद से, ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमत 70 USD प्रति बैरल से बढ़कर कभी-कभी 119 USD से भी अधिक हो गई है। शुक्रवार को, बातचीत शुरू होने से पहले, जून डिलीवरी के लिए ब्रेंट की कीमत 0.8 प्रतिशत गिरकर 95.20 USD प्रति बैरल हो गई थी।