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पाकिस्तान में आतंकवाद का कहर: जुलाई 2026 में 606 लोगों की जान गई

पाकिस्तान में जुलाई 2026 का महीना उग्रवाद और आतंकवाद के लिए बेहद दर्दनाक साबित हुआ, जिसमें 606 लोगों की जान गई। इस दौरान सुरक्षाकर्मियों की हानि और आतंकवादी हमलों में वृद्धि ने सुरक्षा स्थिति को गंभीर बना दिया है। बलूचिस्तान में हालात और भी खराब हैं, जहां मौतों की संख्या में भारी वृद्धि देखी गई है। जानें इस संकट के पीछे की नीतिगत खामियां और आंकड़े।
 

पाकिस्तान की उग्रवाद की स्थिति


नई दिल्ली: पाकिस्तान, जो खुद अपने क्षेत्र में आतंकवाद और उग्रवाद को बढ़ावा देता रहा है, अब उसी संकट में फंस चुका है। हाल के दिनों में, देश में उग्रवादी हिंसा ने एक बार फिर से विकराल रूप धारण कर लिया है। जुलाई 2026 का महीना पाकिस्तान के लिए इस वर्ष का सबसे दुखद और रक्तरंजित महीना साबित हुआ, जिसमें आतंकवादी हमलों और सुरक्षा बलों के अभियानों में 606 लोगों की जान गई और 232 लोग गंभीर रूप से घायल हुए।


आंकड़ों का भयावह सच

इस वर्ष के किसी भी महीने में यह मौतों की सबसे बड़ी संख्या है, जो यह दर्शाती है कि पाकिस्तान में सुरक्षा की स्थिति कितनी गंभीर हो चुकी है। अपहरण के मामलों में भी जून की तुलना में 100 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 33 से बढ़कर 66 हो गई। बलूचिस्तान में सुरक्षाकर्मियों की मौतों में 933 प्रतिशत की वृद्धि ने सबको चौंका दिया है।


सुरक्षाकर्मियों की हानि

इस्लामाबाद स्थित 'पाकिस्तान इंस्टीट्यूट फॉर कॉन्फ्लिक्ट एंड सिक्योरिटी स्टडीज' (PICSS) की रिपोर्ट के अनुसार, जुलाई में 112 सुरक्षाकर्मी मारे गए। सैन्य कार्रवाई में 401 आतंकवादियों को ढेर किया गया, जो जून की तुलना में 109 प्रतिशत अधिक है। इस दौरान 74 आम नागरिक और 19 शांति समिति के सदस्य भी उग्रवादियों का शिकार बने।


बलूचिस्तान में स्थिति गंभीर

पाकिस्तानी सेना और उग्रवादियों के बीच चल रही इस लड़ाई का सबसे अधिक असर बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा (KPK) प्रांतों पर पड़ा है। बलूचिस्तान में जुलाई में 372 मौतें हुईं, जो जून में हुई 109 मौतों की तुलना में 241 प्रतिशत की वृद्धि है।


पाकिस्तान की नीतियों का परिणाम

पाकिस्तान की इस गंभीर स्थिति के पीछे उसकी खुद की नीतियों में खामियां और आतंकवाद को बढ़ावा देने का इतिहास है। दशकों तक उग्रवादी संगठनों को समर्थन देने का खामियाजा आज उसे भुगतना पड़ रहा है। 1990 के दशक में जिस उग्रवादी सोच को बढ़ावा दिया गया, उसी से निकले तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) जैसे समूह अब पाकिस्तान के लिए सबसे बड़े खतरे बन चुके हैं। 'ग्लोबल टेररिज्म इंडेक्स 2026' में पाकिस्तान पहली बार दुनिया में शीर्ष स्थान पर पहुंच गया है।