पाकिस्तान में इमरान खान की रिहाई के लिए PTI का लॉन्ग मार्च: पेशावर में बढ़ा सियासी तापमान
सियासी माहौल में गर्मी
नई दिल्ली: पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर राजनीतिक स्थिति काफी गर्म हो गई है। उनकी पार्टी, पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ (PTI), का लॉन्ग मार्च गुरुवार शाम को पेशावर पहुंच गया। इस मार्च का नेतृत्व खैबर पख्तूनख्वा के मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी कर रहे हैं। पार्टी के समर्थक लगातार इमरान खान की रिहाई की मांग कर रहे हैं। अब सभी की नजर इस बात पर है कि यह काफिला इस्लामाबाद की ओर कब और कैसे आगे बढ़ेगा।
मार्च की शुरुआत लक्की मरवत से
PTI ने 4 अक्टूबर को लक्की मरवत से इस मार्च की शुरुआत की थी। पार्टी का प्राथमिक लक्ष्य काफिले को पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद तक पहुंचाना था। यह मार्च कई क्षेत्रों से होते हुए गुरुवार को पेशावर पहुंचा। हालांकि, आगे के सफर के बारे में पार्टी नेतृत्व ने कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी है। PTI के आधिकारिक सोशल मीडिया पर बताया गया कि मुख्यमंत्री सोहेल अफरीदी का काफिला पेशावर के हयाताबाद टोल प्लाजा पहुंचा, जहां बड़ी संख्या में समर्थक एकत्र हुए और नेताओं के समर्थन में नारे लगाए।
सोहेल अफरीदी का संबोधन
पेशावर में समर्थकों को संबोधित करते हुए सोहेल अफरीदी ने इस मार्च को 'असली आजादी की लड़ाई' करार दिया। उन्होंने कहा कि रास्ते में आने वाली कठिनाइयाँ इमरान खान के जेल में झेले जा रहे कष्टों के मुकाबले कुछ भी नहीं हैं। इस दौरान समर्थकों ने इमरान खान की रिहाई की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी की।
PTI और केंद्र सरकार के बीच तनाव
इमरान खान की पार्टी और शहबाज शरीफ सरकार के बीच पहले से ही राजनीतिक खींचतान चल रही है। PTI ने सरकार के साथ बातचीत बेनतीजा रहने के बाद मार्च जारी रखने का निर्णय लिया था। इस्लामाबाद में प्रदर्शन और सभाओं को लेकर सरकार ने चेतावनी भी दी है। मार्च को पहले 27 सितंबर को आयोजित करने की योजना थी, लेकिन इसे 4 अक्टूबर तक टाल दिया गया। अब राजधानी की ओर बढ़ने की संभावित कोशिश को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है।
इंटरनेट सेवाओं में व्यवधान
मार्च के पेशावर पहुंचने से पहले बुधवार रात शहर के कुछ क्षेत्रों में मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बाधित होने की खबरें आई थीं। हालांकि, इन व्यवधानों के कारणों के बारे में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि PTI अपने काफिले को इस्लामाबाद तक ले जाने के लिए क्या रणनीति अपनाती है और सरकार की ओर से क्या कदम उठाए जाते हैं। इमरान खान की रिहाई की मांग को लेकर यह मार्च पाकिस्तान की राजनीति में तनाव का एक और बड़ा मुद्दा बन गया है।