पाकिस्तान में ऐतिहासिक हिंदू मंदिर का ढहना: विवाद और आरोपों का सिलसिला
मंदिर के ढहने से उठा विवाद
नई दिल्ली: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत के नरोवाल जिले में स्थित एक 100 से 125 साल पुराना हिंदू मंदिर अचानक ढह गया, जिससे एक बड़ा विवाद उत्पन्न हो गया है। इस प्राचीन स्थल के बारे में स्थानीय अल्पसंख्यक संगठनों और सरकारी अधिकारियों के बीच मतभेद स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहे हैं। हिंदू समुदाय और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने धार्मिक कट्टरपंथियों पर मंदिर को गिराने का गंभीर आरोप लगाया है, जबकि सरकारी अधिकारी इसे तेज मानसूनी बारिश का परिणाम बता रहे हैं। ईटीपीबी के वरिष्ठ अधिकारी राणा इफ्तिखार ने स्वीकार किया कि ढांचा पुराना था, लेकिन उन्होंने तोड़फोड़ के आरोपों को सिरे से नकार दिया।
प्रशासनिक लापरवाही का मामला
इस विवाद की जड़ें ईटीपीबी के पूर्व निर्णयों से जुड़ी हुई हैं। मंदिर के पास की भूमि पहले एक मदरसे को लीज पर दी गई थी। वर्षों तक किराया न चुकाने और शर्तों का पालन न करने के कारण, ईटीपीबी के सियालकोट डिप्टी एडमिनिस्ट्रेटर ने 29 जनवरी 2026 को इस लीज को रद्द कर दिया। प्रशासन ने अवैध कब्जाधारियों को हटाने और परिसर को सील करने का आदेश दिया था, लेकिन इसे लागू नहीं किया गया, जिससे कब्जाधारियों का हौसला बढ़ा।
अवैध कब्जे की आशंका
पाकिस्तान मसीहा मिल्लत पार्टी (पीएमएमपी) और स्थानीय अल्पसंख्यकों का कहना है कि 21 अगस्त को तहरीक-ए-लब्बैक पाकिस्तान (टीएलपी) से जुड़े कुछ असामाजिक तत्वों ने जानबूझकर मंदिर को नुकसान पहुंचाया। आरोप है कि मंदिर की 1,000 वर्ग मीटर की मूल्यवान भूमि को पास के मदरसे के दायरे में मिलाने की मंशा से इस ढांचे को गिराया गया।
सरकारी तर्क और हिंदू समुदाय की चिंताएं
ईटीपीबी के अधिकारी राणा इफ्तिखार ने कहा कि मंदिर की ढहने की वजह मूसलाधार बारिश थी और उन्होंने तोड़फोड़ के आरोपों को खारिज किया। हिंदू समुदाय के नेता रतनलाल ने जिला प्रशासन और ईटीपीबी पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि अवैध मदरसे और लगातार मिल रही धमकियों के कारण स्थानीय हिंदू अब उस पवित्र स्थल पर जाने से भी डर रहे हैं। अल्पसंख्यक नेताओं ने इस घटना पर कड़ा विरोध जताते हुए पंजाब सरकार से दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई, अवैध कब्जे हटाने और मंदिर को उसके मूल स्वरूप में पुनर्स्थापित करने की मांग की है।