पाकिस्तान में गधे की रेस: कराची की अनोखी परंपरा जो सबको कर रही है हैरान
गधे की रेस का अनोखा आयोजन
नई दिल्ली: पाकिस्तान में 16 अगस्त को एक अनोखी रेस का आयोजन हुआ, जिसने सोशल मीडिया पर हलचल मचा दी। कराची की सड़कों पर घोड़े की जगह गधे दो पहियों वाली गाड़ियों को खींचते हुए दौड़ते दिखाई दिए। इस रेस का वीडियो वायरल होने के बाद लोग इस अद्भुत प्रतियोगिता के बारे में चर्चा कर रहे हैं। एक प्रतिभागी ने जीत के बाद अपने गधे को गले लगाया, जिससे वहां मौजूद लोग हंस पड़े।
पारंपरिक खेल की जड़ें
यह प्रतियोगिता केवल मनोरंजन के लिए नहीं, बल्कि कराची की पुरानी लोक परंपरा का हिस्सा है, विशेषकर लयारी क्षेत्र में। ट्रेडिशनल स्पोर्ट्स एंड गेम्स पाकिस्तान एसोसिएशन के अनुसार, लयारी के निवासियों ने दशकों से इस खेल को जीवित रखा है। इसकी उत्पत्ति औपनिवेशिक काल से जुड़ी मानी जाती है, जब कराची के आसपास के मछुआरे अपनी गाड़ियों के साथ रेस लगाते थे। कराची साउथ डोंकी-कार्ट एसोसिएशन के एक अधिकारी ने भी इस परंपरा के लंबे इतिहास का उल्लेख किया है।
गधों की तैयारी
रेस के लिए गधों को किया जाता है तैयार
इस प्रतियोगिता में भाग लेने वाले गधों को विशेष तरीके से तैयार किया जाता है। आमतौर पर युवा और स्वस्थ गधों का चयन किया जाता है। रेस से पहले उनकी देखभाल और पोषण पर ध्यान दिया जाता है। गधे के मालिक उन्हें बेहतर आहार देने का प्रयास करते हैं, जैसे चना और मूंगफली। उनका मानना है कि गधे की अच्छी सेहत ही उसे रेस में आगे बढ़ा सकती है। इसके अलावा, हल्की और छोटी गाड़ियां भी तैयार की जाती हैं ताकि गधे उन्हें आसानी से खींच सकें।
रेस की दूरी
5 से 7 किलोमीटर तक होती है रेस
हर आयोजन में रेस का मार्ग अलग होता है। विभिन्न वर्षों में कराची की अलग-अलग सड़कों पर रेस आयोजित की गई है। एक पारंपरिक रेस गुलबाई चौक से जहांगीर कोठारी परेड तक लगभग 7 किलोमीटर की होती है। 2024 में आयोजित प्रतियोगिता ICI ब्रिज से कमिश्नर ऑफिस तक हुई थी, जिसमें 40 से अधिक गाड़ियां शामिल थीं। वहीं, 16 अगस्त की रेस नेटिव जेट्टी ब्रिज से शुरू होकर कमिश्नर ऑफिस तक पहुंची, जिसकी दूरी लगभग 5 से 6 किलोमीटर थी।
गधों के नाम और दर्शक
गधों के नाम भी होते हैं खास
लयारी में इस खेल का पुराना आकर्षण रहा है। पहले स्थानीय लोग, बच्चे और परिवार बड़ी संख्या में रेस देखने आते थे। कुछ दर्शक अपने पसंदीदा गधों पर दांव भी लगाते थे। 2014 में सिंध फेस्टिवल के दौरान कराची में करीब 50 गधों की रेस आयोजित हुई थी, जिसमें गधों के अनोखे नाम जैसे चिंगारी, FIR, कंप्यूटर और डंपर चर्चा का विषय बने थे।
गधागाड़ियों का उपयोग
आज भी कराची में काम आती हैं गधागाड़ियां
कराची में गधागाड़ियां केवल रेस तक सीमित नहीं हैं। शहर की तंग गलियों और बाजारों में इनका उपयोग सामान ढोने के लिए किया जाता है। निर्माण सामग्री, कृषि उत्पाद और कचरा ले जाने में भी ये गाड़ियां सहायक होती हैं। जहां बड़ी गाड़ियां नहीं पहुंच पातीं, वहां गधागाड़ियां उपयोगी साबित होती हैं। खास बात यह है कि जो गधे आम दिनों में सामान ढोते हैं, वही रेस के दौरान तेज रफ्तार से गाड़ियां खींचते नजर आते हैं।