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पाकिस्तान में नाबालिग बहनों का दर्द: अपहरण और धर्म परिवर्तन की कहानी

पाकिस्तान के सिंध प्रांत में दो नाबालिग बहनों के अपहरण और धर्म परिवर्तन की घटना ने हिंदू समुदाय में चिंता की लहर पैदा कर दी है। परिवार का आरोप है कि इन लड़कियों को जबरदस्ती उठाया गया और शादी कर दी गई। अदालत में पेशी के दौरान, बहनें अपने परिवार से मिलने की इच्छा व्यक्त करती रहीं, जिससे उनकी स्थिति की गंभीरता का पता चलता है। यह मामला न केवल इन बहनों का, बल्कि पूरे समुदाय की सुरक्षा और अधिकारों पर सवाल उठाता है।
 

पाकिस्तान में बहनों का मामला फिर से चर्चा में


नई दिल्ली: पाकिस्तान के सिंध प्रांत के टांडो अल्लाहयार में इब्राहिम कॉलोनी की दो छोटी बहनें एक बार फिर से सुर्खियों में हैं। ये नाबालिग लड़कियां, जिनकी उम्र 13 और 14 साल है, कच्ची कोल्ही समुदाय से संबंधित हैं। उनके परिवार का आरोप है कि इनका अपहरण किया गया, धर्म परिवर्तन कराया गया और फिर शादी कर दी गई। परिवार का कहना है कि दोनों बहनों का अपहरण किया गया और इसके बाद उन्हें इस्लाम कबूल करवाकर अमजद सोलंगी और मंसूर सोलंगी नाम के दो युवकों से विवाह करने के लिए मजबूर किया गया। यह घटना लगभग एक महीने पहले हुई थी। FIR दर्ज की गई, लड़कियां बरामद भी हुईं, लेकिन मामला अब अदालत में उलझा हुआ है। अब तक वे तीन बार कोर्ट में पेश हो चुकी हैं।


कोर्ट में बहनों की भावनाएं

सुनवाई के दौरान, दोनों बहनों को उनके परिवार के पास भेजने के बजाय एक सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। कोर्ट के अंदर और बाहर, दोनों बहनें बेहद परेशान नजर आईं। जानकारी के अनुसार, वे बार-बार कह रही थीं, “हम घर जाना चाहते हैं।” एक 13 साल की बच्ची इतनी भावुक हो गई कि वह बेहोश हो गई और उसे तुरंत अस्पताल ले जाना पड़ा।


अल्पसंख्यक अधिकार संगठन के अध्यक्ष शिवा कच्छी वहां मौजूद थे। उन्होंने बताया कि बच्चियों और उनके माता-पिता दोनों ही अत्यंत चिंतित हैं। बच्चियां अपने माता-पिता से गले मिलकर रो रही थीं। परिवार का आरोप है कि उनके बयान ठीक से नहीं लिए गए और मेडिकल रिपोर्ट आने से पहले ही उन्हें सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया। वे यह भी कह रहे हैं कि उनके साथ अन्याय हो रहा है।


सिंध में अल्पसंख्यकों की चिंता

यह घटना सिंध के हिंदू समुदाय में फिर से चिंता का कारण बन गई है। यहां पाकिस्तान की सबसे बड़ी हिंदू आबादी निवास करती है। ऐसे मामलों की एक लंबी श्रृंखला चल रही है। ब्रिटिश रिपोर्टों के अनुसार, 2021 से 2024 के बीच अल्पसंख्यक लड़कियों से जुड़े सैकड़ों मामले दर्ज हुए हैं, जिनमें से अधिकांश हिंदू लड़कियों के हैं और ये ज्यादातर सिंध से ही सामने आए हैं।


दो छोटी बहनों की यह कहानी केवल एक परिवार का दुख नहीं है, बल्कि यह कई परिवारों की उस चिंता को दर्शाती है जो अपनी बेटियों की सुरक्षा को लेकर लगातार चिंतित रहते हैं।